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Bengal Election: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रचार चरम पर है. चुनाव आयोग रोजाना विचाराधीन वोटरों की सूची जारी कर रहा है. पूरक सूची में अपना नाम नहीं देख लोग भड़क रहे हैं. पूर्वी बर्धमान के केतुग्राम में स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों को जाम कर दिया. उनका आरोप है कि सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद जानबूझकर उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि 1904 के दस्तावेज़ जमा करने के बाद भी उसके पूरे परिवार के नाम छोड़ दिए गए. तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना को लेकर आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है.
12 बूथों से हटाये गये 1500 वोटर
केतुग्राम के 12 बूथों में अब तक 1,500 से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाये जा चुके हैं. इनमें से एक बूथ में 444 नाम विचाराधीन थे, जिनमें से 440 नाम हटाये गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि केतुग्राम के अंखोना गांव के बूथ नंबर 13 में विचाराधीन सूची में 426 नाम थे. पूरक सूची में 397 नाम छूट गए. एक अन्य बूथ में भी 116 नाम छूट गए. आज स्थानीय निवासियों ने सैकड़ों मतदाताओं के नाम सूची से छूट जाने के बाद विरोध प्रदर्शन किया.
दादा का दस्तावेज भी नहीं आया काम
मोजम्मेल शेख नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा- मेरे दादाजी का जन्म 1904 में हुआ था. वे एक जहाज पर काम करते थे. मैंने 1904 के दस्तावेज़ जमा किए. फिर भी, मेरे परिवार के सभी सदस्यों के नाम सूची में नहीं हैं. क्या यह बच्चों का खेल है. अलो शेख नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा- मेरा एक नाम है। मेरे पिता और भाई के नाम छोड़ दिए गए हैं. अगर उन्होंने मेरे पिता का नाम छोड़ दिया है, तो मैं कहाँ से आया हूं. वे जानबूझकर नाम छोड़ रहे हैं. वे जानबूझकर नाम छोड़ रहे हैं.
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तृणमूल ने भाजपा पर साधा निशाना
राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने नाम छूटने के मामले में आयोग और भाजपा को निशाना बनाया है. तृणमूल के अंखोना क्षेत्र के अध्यक्ष मीर रौशन अली ने कहा- ममता बनर्जी यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं कि वैध मतदाताओं के नाम न छूटें. हम उन लोगों की सूची राज्य नेतृत्व को भेजेंगे जिनके नाम छूट गए हैं. तृणमूल उनके लिए लड़ेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की साजिश के तहत नाम हटे हैं. हालांकि, आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं.
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