Mamata Banerjee Letter to CEC: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. मंगलवार को मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को 3 पेज का एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राज्य में चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के जरिये बंगाल के ‘असली’ मतदाताओं का अधिकार छीनने की साजिश रची जा रही है.
लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश – ममता
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये हैं. उन्होंने लिखा कि निर्वाचन आयोग द्वारा लिये जा रहे हालिया फैसले जनता के लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा- यह वह मापदंड नहीं है, जिसकी अपेक्षा किसी संवैधानिक प्राधिकार (Constitutional Authority) से की जाती है.
क्या है ‘असली मतदाता’ वाला पूरा विवाद?
निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत बंगाल में 60 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम ‘विचाराधीन’ श्रेणी में डाल दिये गये हैं. एसआईआर प्रक्रिया की वजह से 200 लोगों की जान पहले ही जा चुकी है. ममता बनर्जी ने कहा कि इस प्रक्रिया की आड़ में उनकी पार्टी टीएमसी के समर्थकों और असली नागरिकों को वोट देने से रोकने की कोशिश हो रही है.
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Mamata Banerjee Letter to CEC: ममता ने की ये मांग
उन्होंने मांग की है कि चुनाव आयोग को पक्षपात नहीं करना चाहिए. निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके. ममता बनर्जी ने यह भी कहा है कि संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसे अभी नजरअंदाज किया जा रहा है.
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोट, 4 मई को फैसला
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 2 चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे. 4 मई को मतगणना होगी. इससे पहले, ममता बनर्जी ने ऐन वक्त पर यह मोर्चा खोलकर साफ कर दिया है कि वे वोटर लिस्ट में हो रहे किसी भी बदलाव को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगी. इस पत्र के बाद अब बंगाल की राजनीति में ‘वोटर वेरिफिकेशन’ एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है.
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