भारत 2047 तक विकसित देश बने इसके लिए एआइ को अपनाना होगा

पश्चिम में लोगों को यह भी डर है कि एआइ व्हाइट कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा.

By GANESH MAHTO | January 11, 2026 1:20 AM

कोलकाता. मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने ””बिजनेस में एआइ की ताकत को सामने लाना”” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव आइएएस एस कृष्णन ने कहा कि एमएसएमई के विस्तार व विकास में एआइ अहम भूमिका निभा सकता है. हम चाहते हैं कि भारत 2047 तक एक विकसित देश बने. ऐसा होने के लिए देश को एआइ को अपनाना होगा. पिछली इंडस्ट्रियल क्रांतियों ने हाथ से काम करने वाले कार्य की जगह ले ली थी. एआइ कॉग्निटिव काम की जगह लेगी. पश्चिम में लोगों को यह भी डर है कि एआइ व्हाइट कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा. भारत में व्हाइट कॉलर जॉब्स का हिस्सा कम है, इसलिए नुकसान भी कम है. एआइ से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे स्टॉक प्राइस से पैदा होने वाले ””एआइ बबल”” फेनोमेनन पर श्री कृष्णन ने बताया कि इस चैलेंज ने मुख्य रूप से पश्चिमी इकोनॉमी को प्रभावित किया है और इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता है. केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर एआइ डेटा सेंटर बनाने की योजना बना रही है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और प्राइवेट सेक्टर से इस पहल में उनके साथ पार्टनरशिप करने की अपील की है. दिलचस्प बात यह है कि भारत में एआइ अपनाने का 60 फीसदी बिजनेस डेवलपमेंट पर फोकस करता है, जो दूसरे देशों से आगे है. इंडिया एआइ इम्पैक्ट समिट 2026 इस साल जल्द ही होगा. सत्र में एनबीसी संस्थापक और निदेशक देबाशीष सेन (आईएएस) ने कहा कि एमएसएमई को एआइ से सबसे ज्यादा आरओआई मिलता है. वे वर्किंग कैपिटल में 15-25 फीसदी की कमी और कम्प्लायंस टाइम में 30-40 प्रतिशत की बचत करते हैं. पश्चिम बंगाल क्रिएटिव प्रोडक्शन में एआइ का इस्तेमाल करके 30- 50 फीसदी कॉस्ट में कमी कर सकता है. वॉइस बेस्ड एआइ, टेक्स्ट से दोगुनी तेजी से बढ़ता है. स्मार्ट सिटीज को इंटेलिजेंट सिटीज में बदलने का समय आ गया है. पश्चिम बंगाल में इंटेलेक्चुअलिटी है, एआइ उसे मल्टीप्लायर देगा. एमसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष दीपक जालान ने कहा कि सभी सेक्टर में एआइ पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है. टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक और बड़े समूह जैसे इंडियन टेक्नोलॉजी लीडर्स एआइ को ऑपरेशन्स, प्रोडक्ट्स और डिसीजन-मेकिंग में गहराई से शामिल कर रहे हैं. एआइ कार्य को ऑटोमेट कर देगा. काउंसिल ऑन आईटी एंड कम्युनिकेशन, एमसीसीआइ के को-चेयरमैन संजीव सांघी ने कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) से चलने वाले एक नये दौर की दहलीज पर खड़ा है, जहां टेक्नोलॉजी जिंदगी बदल रही है और देश की तरक्की को आकार दे रही है.

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