Election Commission New Postal Ballot Rules: चुनावी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वोटरों के लिए निर्वाचन आयोग (ECI) ने नियमों को और कड़ा कर दिया है. इलेक्शन कमीशन ने पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) मतदान प्रक्रिया को लेकर नये और बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किये. अब डाक मतपत्र के जरिये होने वाली वोटिंग किसी सामान्य मतदान केंद्र से कम सुरक्षित नहीं होगी. आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात मतदाता अब केवल निर्दिष्ट सुविधा केंद्रों (FC) पर ही अपना वोट डाल सकेंगे. बैलट पेपर घर ले जाने की अनुमति नहीं होगी. किसी और से बैलट पेपर मंगवा भी नहीं पायेंगे.
CCTV की नजर और CAPF का पहरा
निर्वाचन आयोग के नये फरमान में कहा गया है कि मतदान की गोपनीयता बनाये रखते हुए पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया जायेगा. प्रत्येक सुविधा केंद्र और डाक मतदान केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे. जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) इसकी ऑनलाइन निगरानी करेंगे. सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होगी कि हर केंद्र के प्रवेश द्वार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का कम से कम आधा सेक्शन तैनात रहेगा. बिना अनुमति किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा.
पर्यवेक्षकों को ‘ट्रिपल चेक’ की जिम्मेदारी
नये नियमों में अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गयी है. अब पर्यवेक्षकों (Observers) को वोटिंग के दिन हर केंद्र का कम से कम 3 बार दौरा करना होगा. क्या हैं नियम, यहां पढ़ें.
- माइक्रो ऑब्जर्वर : प्रत्येक मतदान बूथ पर ग्रुप ‘बी’ स्तर के अधिकारी को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जायेगा.
- मोबाइल बैन : मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर पाबंदी रहेगी. पर्यवेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि इस नियम का पालन हो रहा है या नहीं.
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Election Commission New Postal Ballot Rules: नियम 18A का सख्त पालन
चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 18A का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा बनाये गये सुविधा केंद्रों पर ही मतपत्र प्राप्त करना, वोट दर्ज करना और उसे वापस करना अनिवार्य है. ये केंद्र मुख्य रूप से प्रशिक्षण स्थलों और रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों में बनाये गये हैं, ताकि प्रक्रिया सुव्यवस्थित रहे.
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चुनाव में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त हुए नियम
निर्वाचन आयोग का यह कदम डाक मतपत्रों के जरिये होने वाली संभावित गड़बड़ियों को रोकने और पारदर्शिता को 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाले बंगाल चुनाव 2026 में इन नये नियमों का असर साफ देखने को मिलेगा.
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