खास बातें
Decoding BJP West Bengal Cabinet: पश्चिम बंगाल की राजनीति को दशकों से कुछ खास संभ्रांत परिवारों और महानगरीय भद्रलोक (बौद्धिक वर्ग) के चश्मे से ही देखा जाता रहा है. लेकिन 2026 में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तिकड़ी ने मिलकर बंगाल के इस सदियों पुराने राजनीतिक व्याकरण को पूरी तरह बदल दिया है.
मंत्रिमंडल में दिखी अभूतपूर्व सोशल इंजीनियरिंग
लोक भवन में सोमवार को हुए 35 नये मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद यदि इस नये मंत्रिमंडल का बारीकी से विश्लेषण (Decoding) करने पर पायेंगे कि यह केवल एक सरकार नहीं, बंगाल के सामाजिक इतिहास में हाशिये पर पड़े लोगों को सत्ता के शीर्ष पर बिठाने का एक अभूतपूर्व ‘सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल है.
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‘अनपढ़ सरकार’ के नैरेटिव पर करारा प्रहार
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेता अक्सर भाजपा पर ‘बाहरी’ और ‘कम पढ़े-लिखे लोगों की पार्टी’ होने का आरोप लगाते रहे हैं. इस बार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस नैरेटिव को जड़ से खत्म करने के लिए मंत्रिमंडल में देश के सबसे उच्च शिक्षित चेहरों को शामिल किया है. इसमें पीएचडी धारक से लेकर कैंसर रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर तक शामिल हैं.
- 3 पीएचडी (PhD) धारक मंत्री : कैबिनेट में 3 ऐसे मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनके पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) की डिग्री है, जिनमें कद्दावर नेता और ऑक्सफोर्ड के छात्र रहे डॉ स्वपन दासगुप्ता प्रमुख चेहरा हैं.
- कैंसर रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर : बिधाननगर सीट से जीतने वाले देश के मशहूर ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) डॉ शारद्वत मुखर्जी और खड़दह के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ कल्याण चक्रवर्ती को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. बेहाला पश्चिम के युवा कैंसर डॉक्टर इंद्रनील खां को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गयी है.
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13 जातियां और सबका साथ का वैज्ञानिक फॉर्मूला
मंत्रिमंडल का सबसे मजबूत और पहलू अभूतपूर्व जातीय और सामाजिक संतुलन है. शुभेंदु अधिकारी की 41 सदस्यीय टीम में 13 अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो बंगाल के इतिहास में पहली बार हुआ है.
- एससी और एसटी (SC-ST) का सबसे बड़ा ब्लॉक : कुल मंत्रियों में से 14 मंत्री विभिन्न जातीय व वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इनमें से 11 विधायकों ने सोमवार को शपथ ली.
- राजबंशी और मतुआ समाज की तूती : उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय के बड़े नेता नीशीथ प्रमाणिक पहले से ही कैबिनेट में हैं. उनके साथ फालाकाटा के दीपक बर्मन को शामिल किया गया है. दक्षिण बंगाल के बेहद निर्णायक मतुआ समुदाय के नेता अशोक कीर्तनिया को भी मंत्री बनाया गया है.
- आदिवासी और गोरखा समाज : कुमारग्राम के आदिवासी नेता मनोज कुमार उरांव और दार्जिलिंग बेल्ट के बिशाल लामा को मंत्री बनाकर पहाड़ से लेकर जंगलमहल तक के जनजातीय समाज को सीधे सचिवालय (नबान्न) से जोड़ दिया गया है.
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घरेलू सहायिका कलिता माझी से लेकर क्रिकेटर अशोक डिंडा तक
भाजपा के इस मंत्रिमंडल फॉर्मूले की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सामाजिक विविधता है, जिसने यह साबित किया है कि अब बंगाल में राजनीति केवल रसूखदारों की बपौती नहीं रही.
- कलिता माझी (सच्चा लोकतंत्र): राजनीति में आने से पहले दूसरों के घरों में बर्तन मांजने और घरेलू सहायिका (Domestic Help) का काम करने वाली कलिता माझी को शुभेंदु सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है. कलिता को मंत्री बनाना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि भाजपा ने जमीन के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को सत्ता सौंपी है.
- अशोक डिंडा (यूथ आइकॉन) : टीम इंडिया और आईपीएल के पूर्व तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को राज्य मंत्री बनाया गया है, जो राज्य के युवाओं और खेल प्रतिभाओं को निखारने का काम करेंगे.
Decoding BJP West Bengal Cabinet: दक्षिण बंगाल का वर्चस्व टूटा, उत्तर बंगाल के विकास को मिलेगी रफ्तार
तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हमेशा आरोप लगता था कि उसके अधिकांश महत्वपूर्ण मंत्री केवल कोलकाता, हावड़ा या हुगली (दक्षिण बंगाल) से ही आते हैं. इसके कारण उत्तर बंगाल और जंगलमहल पूरी तरह उपेक्षित रह जाते थे. शुभेंदु अधिकारी ने इस विस्तार में अकेले उत्तर बंगाल से 9 मंत्रियों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर दी है, जिससे सिलीगुड़ी, अलीपुरदुआर, कूचबिहार और दार्जिलिंग के विकास को अब सीधे सुपरफास्ट रफ्तार मिलेगी.
