हुगली. कोन्नगर नगरपालिका क्षेत्र के प्राचीन गंगा किनारे स्थित श्मशान घाट में अब तक लकड़ी जला कर ही अंतिम संस्कार किये जाते थे, जिससे वातावरण में प्रदूषण फैलता था. पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता की मांग को ध्यान में रखते हुए अब यहां तीन करोड़ रुपये की लागत से पर्यावरण अनुकूल विद्युत शवदाह गृह का निर्माण किया जा रहा है. कोन्नगर नगरपालिका के चेयरमैन सपन कुमार दास ने बताया कि श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए भीड़ लगातार बढ़ रही थी. कोन्नगर के साथ-साथ कन्हाईपुर, नबग्राम, डानकुनी और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी यहां शव दाह के लिए आते हैं. राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग दो करोड़ रुपये मंजूर किये हैं और विद्युत चूल्हे का काम शुरू हो चुका है. इस नये विद्युत शवदाह गृह में धुआं जलाने के बाद सीधे वातावरण में नहीं जायेगा, बल्कि पहले वाटर ट्रीटमेंट के माध्यम से साफ किया जायेगा और फिर ऊंची चिमनी से बाहर निकलेगा, जिससे वायु प्रदूषण कम होगा. स्थानीय लोगों की यह पुरानी मांग पूरी हो रही है और उम्मीद है कि जनवरी तक यह सुविधा चालू हो जायेगी. उत्तरपाड़ा के पूर्व विधायक और कोन्नगर निवासी प्रबीर घोषाल ने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आवश्यक कदम है, जिसके लिए नगरपालिका अध्यक्ष सपन दास और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धन्यवाद देना चाहिए. नगर विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने भी इस परियोजना को अनुमति प्रदान की है, जो आम जनता के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होगी. कोन्नगर निवासी जयंत चक्रवर्ती ने कहा कि अब तक विद्युत शवदाह गृह की सुविधा न होने के कारण कई लोगों को दूर उत्तरपाड़ा या रिसड़ा जाना पड़ता था, जहां चूल्हा बंद होने पर परेशानी होती थी. अब कोन्नगर में यह सुविधा मिलने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
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