एयरोफोनिक सब्जी उगाने का झांसा देकर लोगों से की 200 करोड़ की ठगी

धोखाधड़ी. आसनसोल में एक के बाद एक चिटफंड के मामले हो रहे उजागर

अग्निमित्रा पाल ने लगाया आरोप पुलिस और तृणमूल नेताओं की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकती इस प्रकार की धोखाधड़ी

ट्रांस्मिटो डेवलपमेंट फाउंडेशन एनजीओ ने लाखों लोगों को बनाया सदस्य, भारी मुनाफे का प्रलोभन देकर लोगों से वसूले पैसेआसनसोल. आसनसोल में एक के बाद एक चिटफंड के मामला उजागर होने से पुलिस और प्रशासन की परेशानी बढ़ गयी है. 15 दिन पहले कथित तौर पर साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया, जिसकी जांच राज्य के आर्थिक अपराध निदेशालय की टीम कर रही है. यह मामला शुरू ही हुआ था कि सफीकुल रहमान का मामला सामने आया. इस मामले में भी लोगों को मोटी रकम मुनाफा का झांसा देकर पैसे लेकर गायब होने की प्राथमिकी आसनसोल साउथ थाने में दर्ज हुई. इस मामला के दर्ज होने के नौ दिनों बाद ही कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की ठगी का नया मामला सामने आया. जिसे लेकर आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल पीड़ितों के साथ आसनसोल साउथ थाने में पहुंची. जहां इस घटना को लेकर भागलपुर (बिहार) जिले के लाहिरी टोला जगदीशपुर इलाके के निवासी धर्मेंद्र तांती ने लिखित शिकायत दर्ज करायी. श्री तांती ने बताया कि देशभर के पांच लाख से अधिक लोगों से करीब दो सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस मामले में ठगी की गयी है. विधायक श्रीमती पाल ने कहा कि चिटफंड का जो भी घोटाला सामने आ रहा है, यह सारा कुछ पुलिस और तृणमूल के नेता-मंत्री के सहयोग के बगैर संभव नहीं है. 350 करोड़ रुपये के घोटाले में तृणमूल अल्पसंख्यक सेल के नेता व उसका बेटा नामजद आरोपी बनाये गये हैं.

क्या है पूरा मामला, कैसे हुई है ठगी?

ठगी के मामले के पीड़ित व शिकायतकर्ता श्री तांती ने बताया कि आसनसोल सेनरेले रोड, आयकर भवन के निकट विवेकानंद सरणी में स्थित ट्रांस्मिटो डेवलपमेंट फाउंडेशन (एनजीओ) संस्था के कर्णधारों एजाज अहमद, नदीम अहमद, साबिर अली, विजय पंडित, अनिल नोनिया ने बेरोजगारों को स्वरोजगार का झांसा देकर सपोर्ट इंडिया डेवलपमेंट प्रोग्राम नाम से एक स्कीम लांच की. इसमें केवल हवा के सहारे में सब्जी उगाने (एयरोफोनिक) का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के नये तरीके को लेकर देशभर में प्रचार किया गया. लोगों को प्रशिक्षण नि:शुल्क दिया जाना था और दिया भी गया. इसमें एक ट्विस्ट लाया गया कि जो लोग इसके सदस्य बनेंगे उन्हें भारी मुनाफा होगा. सदस्य बनने के लिए 875 रुपये लिया जाने लगा, फिर इसमें छूट देकर 400 रुपये और बाद में 275 रुपये में भी सदस्य बनाये गये. सदस्यों को प्रतिमाह 300 रुपये देने होते थे. जिससे उन्हें प्रति चार माह बाद-बाद तीन हजार रुपये मिलते. एक सदस्य यदि 10 सदस्य बनाता है तो उसे चार माह बाद-बाद 10 हजार रुपये और 20 सदस्य बनाता है तो 25 हजार रुपये करके मिलेते. जो इस संस्था का सदस्य है और उसने कोई सदस्य नहीं बनाया उसे स्वरोजगार के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, 10 सदस्य बनाने वाले को पांच लाख रुपये और 20 सदस्य बनाने वाले को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गयी. दिसंबर 2022 से यह कार्यक्रम शुरू हुआ. लोगों ने इस कार्यक्रम को हाथों-हाथ लिया. शुरुआत में लोगों को पैसे भी मिले, जिससे भारी संख्या में लोग जुड़ने लगे. संस्था ने नयी स्कीम निकाली जिसमें ब्लॉक (प्रखंड) बेचा जाने लगा. ब्लॉक का प्रभारी बनने के लिए पहले 2.75 लाख रुपये, फिर छूट देकर 1.55 लाख रुपये, बाद के 27,500 रुपये में ब्लॉक प्रभारी बनाया जाने लगा. ब्लॉक प्रभारियों को अपने क्षेत्र के प्रशिक्षण का कार्यक्रम करवाने के साथ प्रतिमाह 66 हजार रुपये देने का वादा किया गया. देशभर में कुल पांच हजार ब्लॉक प्रभारी बनाकर पैसे लिये. कुछ दिनों बाद से ही पैसे देने में बहाना बनाया जाने लगे. दिसंबर 2024 से पैसा देना बंद कर दिया गया. किसी का फोन भी नहीं लग रहा था.

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Author: GANESH MAHTO

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