BJP MP Demands Action Against West Bengal Govt: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन पर कोलकाता से दिल्ली तक संग्राम छिड़ गया है. बुधवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बाबू राम निषाद ने इसे ‘चूक’ नहीं बल्कि ‘संवैधानिक अपराध’ करार दिया. शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाये, ताकि कोई अन्य राज्य भविष्य में ऐसी हिमाकत न कर सके.
पश्चिम बंगाल पर अनुच्छेद 356 की तलवार!
सांसद बाबू राम निषाद ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार का आचरण संविधान के अनुच्छेद 52 से 62, और अनुच्छेद 256 व 257 का खुला उल्लंघन है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई राज्य सरकार जान-बूझकर राष्ट्रपति का अपमान करती है, तो इसे ‘संवैधानिक विफलता’ माना जाना चाहिए. निषाद ने मांग की कि ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की व्यवस्था हो और संबंधित अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जाये.
अनुच्छेद 356, 25 से 62, अनुच्छेद 256 और 257 को जानें
| अनुच्छेद | क्या है अनुच्छेद में |
|---|---|
| अनुच्छेद 356 | यह केंद्र सरकार को किसी राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ लगाने की शक्ति देता है, यदि वहां का संवैधानिक तंत्र विफल हो जाये. इसे राज्य सरकार को बर्खास्त करने का सबसे शक्तिशाली और विवादित औजार माना जाता है. |
| अनुच्छेद 52 से 62 | ये अनुच्छेद भारत के ‘राष्ट्रपति’ के पद, उनकी योग्यता, चुनाव प्रक्रिया और कार्यकाल की व्याख्या करते हैं. इसमें राष्ट्रपति के महाभियोग (पद से हटाने की प्रक्रिया) और उनके पद की गरिमा के नियमों का उल्लेख है. |
| अनुच्छेद 256 | यह अनुच्छेद कहता है कि प्रत्येक राज्य अपनी शक्ति का प्रयोग संसद द्वारा बनाये गये कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए करेगा. सरल शब्दों में कहें, तो राज्यों की सरकारें केंद्र के कानूनों को लागू करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं. |
| अनुच्छेद 257 | इस अनुच्छेद के तहत केंद्र सरकार कुछ विशेष स्थितियों में राज्यों को निर्देश (Directives) दे सकती है, ताकि केंद्र की शक्ति में बाधा न आये. इसमें रेलवे और राष्ट्रीय महत्व के संचार साधनों की सुरक्षा के लिए राज्यों को निर्देश देना भी शामिल है. |
राज्यसभा में तीखी नोक-झोंक
जैसे ही भाजपा सांसद ने यह मुद्दा उठाया, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. जवाब में भाजपा के अन्य सदस्यों ने निषाद का पुरजोर समर्थन किया. सदन में इस ‘प्रोटोकॉल वॉर’ के चलते काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा.
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क्या था पूरा विवाद?
7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल के दौरे पर थीं. तब प्रोटोकॉल के ‘ब्लू बुक’ नियमों के विपरीत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) वहां मौजूद नहीं थे. नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य के इन शीर्ष पदों पर बैठे लोगों का उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर होना अनिवार्य है.
संसद में भाजपा और निषाद ने क्या कहा
- संवैधानिक उल्लंघन : भाजपा ने इसे अनुच्छेद 52-62, 256 और 257 का सीधा उल्लंघन बताया.
- कार्रवाई की मांग : राज्य सरकार के विवेकाधीन अनुदानों (Discretionary Grants) में कटौती की मांग की गयी.
- नया कानून : संवैधानिक प्रमुखों के अपमान की स्थिति में विशेष कठोर कानून बनाने का सुझाव दिया गया.
- राष्ट्रीय गौरव : राष्ट्रपति पद को 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक बताते हुए गरिमा बनाये रखने पर जोर दिया गया.
चूक नहीं, संवैधानिक अपराध है
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान जो हुआ, वह महज चूक नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अपराध है. जब राज्य सरकार जान-बूझकर सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है, तो वह यह कैसे भूल जाती है कि उसने खुद संविधान की शपथ ली है?
बाबू राम निषाद, राज्यसभा सांसद, भाजपा
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