कोलकाता.
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर शनिवार को राज्य सरकार की ओर से बंगाल के विभूतियों को बंग विभूषण व बंग भूषण सम्मान प्रदान किया गया. इस सम्मान समारोह में उस समय आश्चर्यजनक घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के राज्यसभा सदस्य व राजवंशी समुदाय के प्रमुख नेता अनंत महाराज को राज्य के सर्वोच्च सम्मान ‘बंगबिभूषण’ से सम्मानित किया.कोलकाता के देशप्रिय पार्क में शनिवार शाम को आयोजित समारोह में सुश्री बनर्जी ने अनंत महाराज सहित राज्य की नौ हस्तियों को बंगबिभूषण, जबकि 16 लोगों को बंग भूषण सम्मान से नवाजा. मुख्यमंत्री ने अनंत महाराज को उतरीय पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिवादन किया. सुश्री बनर्जी ने अनंत महाराज की प्रशंसा की और दीर्घायु होने की कामना की.इस मौके पर अनंत महाराज ने इस सम्मान के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए राजबंशी समुदाय के अग्रणी नेता रहे चिला राय की लिखी एक कविता सुनायी. पत्रकारों से बातचीत में अनंत महाराज ने भाजपा व केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाजपा ने उत्तर बंगाल और कोच व राजवंशी समुदाय के लिए कोई काम नहीं किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल को लगातार वंचित किया जा रहा है. इसकी कोई सीमा नहीं है.
सभी भाषाएं समान रूप से सम्मान की पात्र हैं : ममताइस मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों को शुभकामनाएं दीं. इसी के साथ उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी भाषाएं समान रूप से सम्मान की पात्र हैं और उन्हें किसी भी प्रकार के ‘प्रहार’ से बचाया जाना चाहिए. भाषा आंदोलनों के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए सुश्री बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार भाषाई विविधता का सम्मान करती है तथा उसने कई भाषाओं को आधिकारिक मान्यता दी है. उन्होंने कहा कि बांग्ला न केवल एक समृद्ध साहित्यिक विरासत वाली भाषा है, बल्कि यह सभी भाषाई समुदायों के प्रति सम्मान की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा भी है. उन्होंने कहा कि हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि राज्य में हर व्यक्ति को, चाहे वह कोई भी भाषा बोलता हो, उसे अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले. ममता बनर्जी ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने विभिन्न भाषाई समूहों के लिए भाषा अकादमियां स्थापित की हैं.
उन्होंने कहा कि इस पावन दिन पर हम अपना संकल्प दोहराते हैं कि यदि किसी भी भाषा पर प्रहार होता है तो हम सब उसके खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे। सभी भाषाएं समान सम्मान की पात्र हैं.