मुख्य बातें
कोलकाता से अमर शक्ति की रिपोर्ट
Bengal News : कोलकाता. जूट यानी गोल्डेन फाइवर की बंपर और जल्दी फसल आने की उम्मीद एक अच्छी खबर है, क्योंकि पश्चिम बंगाल का जूट उद्योग लंबे समय से कच्चे माल की कमी से जूझ रहा था, जिससे मिलों का कामकाज प्रभावित हुआ और लागत बढ़ गयी. जूट उगाने वाले प्रमुख इलाकों से शुरुआती बाजार की सूचनाओं से पता चलता है कि वर्ष 2026-27 की फसल पिछले साल की तुलना में काफी अधिक हो सकती है और व्यापारिक अनुमानों के अनुसार उत्पादन 95-100 लाख गांठ के दायरे में हो सकता है. वर्ष 2025-26 में, आधिकारिक कच्चा जूट उत्पादन 75 लाख गांठ था, लेकिन मिल सूत्रों का कहना था कि वास्तविक मात्रा इससे कहीं कम थी.
क्या कहा आइजेएमए के प्रतिनिधियों ने
इस संबंध में भारतीय जूट मिल संघ (आइजेएमए) के अध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता ने कहा कि उत्पादन का जो आंकड़ा चर्चा में है, वह शुरुआती बाजार जानकारी पर आधारित है और संघ का आधिकारिक आकलन जल्द ही आयेगा. आइजेएमए के पूर्व अध्यक्ष संजय कजारिया ने कहा कि जूट व्यापार से जुड़े एक व्यक्ति के तौर पर, मैं इस स्थिति को बहुत नाजुक संतुलन वाली कहूंगा. एक तरफ, पाइपलाइन में कच्चे जूट की सीमित उपलब्धता के कारण मिलों को कामकाज में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, दूसरी तरफ नई फसल के जल्दी और अच्छी मात्रा में आने की उम्मीद है.
किसानों ने बढ़ाया है बुआई का दायरा
व्यापार सूत्रों के अनुसार, असम, उत्तर और दक्षिण बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में किसानों ने इस साल बुवाई का दायरा बढ़ाया है. उन्हें सत्र की शुरुआत में एमएसपी से तीन गुना ज्यादा कीमतों से प्रोत्साहन मिला. बुवाई के समय मौसम अनुकूल रहने से कई उत्पादक क्षेत्रों में फसल अच्छी हुई है. कुछ इलाकों में फसल समय से पहले तैयार हो रही है, जिससे उम्मीद है कि एक जुलाई को नये जूट सत्र की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही जून के आखिर से नयी फसल बाजार में आने लगेगी. फसल की बेहतर होती स्थिति, उद्योग की मौजूदा हालत के बिल्कुल उलट है. आपूर्ति की कमी और स्टॉक पर पाबंदियों के बीच जूट मिलों को कच्चा माल जुटाने में मुश्किल हो रही है, जिससे कच्चे जूट की कीमतों में भारी उछाल आया है और कामकाज में दिक्कतें आ रही हैं.
बाजार के जानकारों की राय
बाजार के जानकारों का कहना है कि अगस्त में डिलिवरी के लिए किये जा रहे वायदा अनुबंध में ही बड़ी फसल की उम्मीदें दिखने लगी हैं. खबरों के मुताबिक, 10 अगस्त की डिलिवरी के लिए लगभग 13,000 रुपये प्रति क्विंटल, 20 अगस्त के लिए 12,000 रुपये और अगस्त के आखिर की डिलिवरी के लिए करीब 11,300 रुपये प्रति क्विंटल के सौदे हो रहे हैं, जबकि अभी अनौपचारिक हाजिर कीमत लगभग 19,000 रुपये प्रति क्विंटल है. उद्योग सूत्रों का कहना है कि वायदा कीमतों में भारी छूट इस उम्मीद को दिखाती है कि अगर नयी फसल जल्दी और अच्छी मात्रा में आती है, तो आपूर्ति में काफी सुधार हो सकता है.
Also Read: बंगाल में तेज विकास चाहती है भाजपा, विशेष आर्थिक पैकेज देने से फिलहाल बच रहा केंद्र
