खड़गपुर के मछली दुकान पर पहुंचे दिलीप घोष, भाजपा उम्मीदवार का सब्जी बाजार में चला जनसम्पर्क

Bengal Election : बंगालियों की की पसंद मछली अब उनकी पहचान और संस्कृति बन गयी है. बंगाल चुनाव में हर उम्मीदवार मछली के साथ दिखना चाहता है. माछ-भात बंगाली इस चुनाव में लगभग सभी दलों का अनौपचारिक नारा बनकर उभरा है.

Bengal Election: खड़गपुर. जीतेश बोरकर. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार अभियान जारी है. इस बार मछली बंगालियों की थाली से अधिक बंगाल की सियासत में दिखाई दे रही है. कोई उम्मीदवार मछली लेकर चुनाव प्रचार कर रहा है तो कोई जनसंपर्क के लिए मछली बाजार पहुंच जा रहा है. खड़गपुर सदर के भाजपा उम्मीदवार और बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी चुनाव प्रचार करने मछली बाजार पहुंचे.

मछली कारोबारी से की बात

खड़गपुर शहर के खरिदा इलाके के मछली बाजार में भाजपा उम्मीदवार ने मछली बेचने और खरीदनेवालों से बात की. उन्होंने बाजार में मौजूद लोगों से समर्थन मांगा. उन्होंने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को सुना और चुनाव के बाद उसे हल कर देने का आश्वासन भी दिया. शहर का खरिदा इलाका हिंदी भाषा भाषियों का क्षेत्र है. ऐसे में दिलीप घोष का मछली बाजार में चुनाव प्रचार करना एक राजनीतिक नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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सियासत के केंद्र में मछली

दरअसल बंगाल के चुनाव में इस बार मछली सियासत के केंद्र में है. बंगाल में मछली एक चुनावी मुद्दा बना हुआ है. इस बार के विधानसभा चुनाव में मछली अप्रत्याशित रूप से असरदार राजनीतिक प्रतीक बन गई है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जहां मछली को बंगाली अस्मिता से जोड़ दिया है और भाजपा पर मछली विरोधी होने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्षी भाजपा कोशिश कर रही है कि उसका रुख बंगाल के लोगों की प्रिय माछ-भात के खिलाफ न दिखे. माछ-भात बंगाली से तात्पर्य मछली और चावल खाने वाले बंगालियों से है.

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By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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