Bangla Pokkho Protest Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच बांग्ला नववर्ष पोइला बोइसाख के जश्न पर पाबंदी के बाद सियासत गरमा गयी है. बांग्ला भाषी लोगों के प्रमुख संगठन ‘बांग्ला पोक्खो’ ने निर्वाचन आयोग (EC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे बंगाली अस्मिता और संस्कृति पर ‘करारा हमला’ करार दिया है. आयोग ने सुरक्षा कारणों और आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए संगठन को जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. हालांकि, संगठन ने साफ कर दिया है कि वे अनुमति न मिलने के बावजूद दक्षिण कोलकाता में अपनी प्रस्तावित शोभा यात्रा निकालेंगे.
आयोग ने बताया अवैध, संगठन बोला- यह हमारा हक
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि कोलकाता पुलिस की सलाह और मौजूदा चुनावी माहौल को देखते हुए जुलूस की अनुमति नहीं दी गयी है. आयोग का तर्क है कि आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू होने के कारण किसी भी ऐसी सभा को, जिसके पास आधिकारिक अनुमति नहीं है, अवैध माना जायेगा.
नववर्ष मनाने से कोई नहीं रोक सकता : बांग्ला पोक्खो
बांग्ला पोक्खो के महासचिव गर्गा चटर्जी ने चुनाव आयोग की तुलना 1971 से पहले के पूर्वी पाकिस्तान के शासन से कर दी. उन्होंने कहा- बंगाल की संस्कृति पर इस तरह का प्रहार पहले कभी नहीं हुआ. हमें नववर्ष मनाने से रोकने का हक किसी को नहीं है.
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उत्तरी कोलकाता में अनुमति खारिज, अब दक्षिण में हुंकार
संगठन ने पहले स्वामी विवेकानंद और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महापुरुषों से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों से होते हुए उत्तरी कोलकाता में रैली की योजना बनायी थी, जिसे आयोग ने ठुकरा दिया था. इसके बाद संगठन ने बुधवार शाम को दक्षिण कोलकाता के रासबिहारी चौराहे से गरियाहाट तक शोभा यात्रा निकालने की घोषणा की.
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‘अपराधी’ कहलाने पर गर्व : गर्गा चटर्जी
गर्गा चटर्जी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल नेताजी सुभाष चंद्र बोस और कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की भूमि है. अगर यहां अपना नववर्ष मनाना अपराध है, तो हमें ‘अपराधी’ कहलाने पर गर्व है.
चुनाव का साया और बढ़ता तनाव
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे समय में बंगाली अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है. प्रशासन सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तो बांग्ला पोक्खो इसे समुदाय के गौरव से जोड़कर देख रहा है. पुलिस ने साफ किया है कि बिना अनुमति के भीड़ जुटाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
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