17 अप्रैल तक बंगाल पहुंच जायेंगी सीएपीएफ की 1920 कंपनियां, 23 मार्च को जारी होगी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट

Assembly Elections 2026: पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. मतदान से पहले ही सभी केंद्रीय बलों की तैनाती पूरी कर ली जायेगी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके.

Assembly Elections 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सुरक्षा-व्यवस्था चाक-चौबंद करते हुए चुनाव आयोग ने राज्य में केंद्रीय बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती का फैसला किया है. फिलहाल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, इंडिया रिजर्व बटालियन और अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस की 480 कंपनियां बंगाल पहुंच चुकी हैं. 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है.

बंगाल चुनाव में तैनात रहेंगी सुरक्षा बल की 2400 कंपनियां

इससे पहले सुरक्षा-व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त रखने के लिए आयोग ने अतिरिक्त 1920 कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया है. इस तरह दोनों चरणों के मतदान कराने के लिए कुल 2400 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी. चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, 31 मार्च तक 300 कंपनियां, 7 अप्रैल तक और 300 कंपनियां, 10 अप्रैल को 300 कंपनियां, 13 अप्रैल को 277 कंपनियां और 17 अप्रैल को 743 कंपनियां बंगाल पहुंच जायेंगी.

पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को

पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. मतदान से पहले ही सभी केंद्रीय बलों की तैनाती पूरी कर ली जायेगी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके.

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चुनाव के बाद भी बंगाल में रहेंगी 500 कंपनियां

दूसरे चरण के मतदान के बाद 200 कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा में मतगणना पूरी होने तक तैनात रहेंगी. कानून-व्यवस्था बनाये रखने और संभावित हिंसा को रोकने के लिए 500 कंपनियां अगले आदेश तक राज्य में ही रहेंगी.

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चुनाव खत्म होने के बाद 1700 कंपनियां आ जायेंगी वापस

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा को देखते हुए आयोग ने यह निर्णय लिया है. मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष 1700 कंपनियों को वापस बुला लिया जायेगा. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि केंद्रीय बलों, इंडिया रिजर्व बटालियन, राज्य सशस्त्र पुलिस और मुख्य बल समन्वयक के साथ मिलकर विस्तृत तैनाती योजना तैयार की जाये.

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Assembly Elections 2026: शलभ माथुर बने स्टेट फोर्स को-ऑर्डिनेटर

केंद्रीय बलों की आवाजाही और तैनाती का समन्वय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल करेगा. सीआरपीएफ पश्चिम बंगाल सेक्टर के महानिरीक्षक शलभ माथुर को राज्य बल समन्वयक नियुक्त किया गया है. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि बलों के लिए परिवहन, रसद, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जायें.

23 मार्च को जारी की जायेगी पूरक मतदाता सूची

अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि एसआइआर के दौरान तार्किक विसंगति श्रेणी में न्यायिक जांच के लिए भेजे गये मामलों की पहली पूरक मतदाता सूची अब 23 मार्च को प्रकाशित की जायेगी, जिसे पहले 20 मार्च को जारी किया जाना था.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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