ABVP Expansion West Bengal Campuses: पश्चिम बंगाल की राजनीति में महा-परिवर्तन का असर अब राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में भी दिखने लगा है. विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ऐतिहासिक जीत के बाद, संघ समर्थित छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने राज्य के कैंपसों में अपनी ताकत को चार गुना बढ़ा लिया है.
एसएफआई और टीएमसीपी के बाद अब एबीवीपी की बारी
जिस बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दशकों तक वामपंथी छात्र संगठनों (SFI) और फिर तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) का एकछत्र राज रहा, वहां अब ABVP ने बड़ी बढ़त हासिल की है. संगठन का दावा है कि चुनाव नतीजों के चंद हफ्तों के भीतर उनकी सक्रिय यूनिट्स की संख्या 96 से बढ़कर 400 के पार पहुंच गयी है.
आंकड़ों में ABVP का महा-विस्तार
चुनाव से पहले बंगाल के कैंपसों में ABVP की उपस्थिति केवल 96 कॉलेजों तक सीमित थी, लेकिन 4 मई के चुनावी नतीजों के बाद यह आंकड़ा 400 को पार कर गया है. केवल छात्र ही नहीं, भारतीय शिक्षण मंडल और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) जैसे संघ से जुड़े शिक्षक संगठनों की सदस्यता भी 10 हजार से बढ़कर 1 लाख के करीब पहुंचने वाली है.
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टीएमसी और वामपंथ के किलों में सेंध, 9 जून से महा-अभियान
ABVP की इस बढ़त की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शामिल होने वाले छात्र कोई नये चेहरे नहीं हैं. ABVP के दक्षिण बंगाल सचिव नीलकंठ भट्टाचार्य के अनुसार, सदस्यता के लिए आने वाली बड़ी संख्या उन छात्रों की है, जो पहले तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) का हिस्सा थे. जादवपुर और प्रेसिडेंसी जैसे वामपंथी गढ़ों में भी अब ABVP की गूंज सुनाई दे रही है. संगठन ने 9 जून से एक औपचारिक सदस्यता अभियान शुरू करने की योजना बनायी है.
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ABVP Expansion West Bengal Campuses: हिंसा फैलाने वालों की एबीवीपी में एंट्री नहीं
एबीवीपी का कहना है कि वे किसी को भी संगठन में सीधे एंट्री नहीं दे रहे हैं. टीएमसी से आने वाले उन चेहरों पर रोक लगायी गयी है, जिनकी छवि कैंपसों में हिंसा फैलाने वाली रही है.
राम नवमी और सरस्वती पूजा का संकल्प
ABVP ने अपनी इस बढ़त के साथ ही कैंपसों के सांस्कृतिक वातावरण को बदलने का भी ऐलान कर दिया है. संगठन ने कहा है कि अब बंगाल के हर कॉलेज में राम नवमी और सरस्वती पूजा का भव्य आयोजन होगा. नयी सरकार और ABVP का मुख्य एजेंडा राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को कड़ाई से लागू करना है, जिसे पिछली सरकार ने वर्षों तक रोके रखा था.
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