सांसद मेला: राज्य सरकार को कोर्ट ने फटकारा

आसनसोल: केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को केंद्र कर आगामी 12 जनवरी से आसनसोल के लोको स्टेडियम में आयोजित होनेवाले चार दिवसीय सांसद मेले के आयोजन के मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट ने मंगलवार को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मेयर जितेंद्र तिवारी को सौंपा. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश हरीश टंडन ने […]

आसनसोल: केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को केंद्र कर आगामी 12 जनवरी से आसनसोल के लोको स्टेडियम में आयोजित होनेवाले चार दिवसीय सांसद मेले के आयोजन के मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट ने मंगलवार को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मेयर जितेंद्र तिवारी को सौंपा. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश हरीश टंडन ने आसनसोल नगर निगम की अनुमति से संबंधित प्रक्रिया के लिए लगायी जा रही शर्तों को लेकर राज्य सरकार और निगम प्रशासन को कड़ी फटकार लगायी.

गौरतलब है कि कि सांसद मेले की सह आयोजक संस्था मी टू वी ने इस संबंध में सोमवार को हाइकोर्ट में मेला आयोजन की अनुमति देने के लिए याचिका दायर की थी. निगम की ओर से शर्तें थोपे जाने के कारण यह याचिका दायर की गयी. निगम प्रशासन ने पहले से ही हाइकोर्ट में केवियट दायर कर रखी थी. इस कारण हाइकोर्ट के न्यायाधीश हरीश टंडन ने मंगलवार को इसकी सुनवायी की.

याचिकाकर्ता के पक्ष में अधिवक्ता एसके कपूर और अधिवक्ता किशोर दत्ता ने दलीलें दीं, जबकि आसनसोल नगर निगम के पक्ष में अतिरिक्त महाधिवक्ता लक्ष्मी गुप्ता ने अपनी बात रखी. आसनसोल नगर निगम के मेयर के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए अदालत ने कहा कि मेयर को उक्त मेला स्थल का निरीक्षण फिर से कराना होगा. मेले की अनुमति के आवेदन पर फिर से विचार कर बुधवार को इस मामले में निर्णय लेना होगा. मेयर को वगैर किसी प्रभाव में आये निष्पक्ष और उचित फैसला लेना होगा.

क्या कहा अदालत ने: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगायी. उन्होंने कहा कि मेले में बॉयो टॉयलेट की मांग हो रही है, जबकि वहां निकासी व्यवस्था क्यों नहीं है? वहां कई और भी आयोजन होते हैं, तब क्यों नहीं ये सारी मांग की जाती है? निगम प्रशासन मेला कमेटी से स्थानीय स्कूलों से इजाजत लेने के लिए कह रहा है, जबकि स्कूल कौन होते हैं इजाजत देनेवाले? पुस्तक मेले या गंगासागर मेले में क्यों नहीं सरकार स्वच्छता या शौच व्यवस्था की बात करती है? कई तीर्थयात्री मैदानी इलाके में हैं, उनकी चिंता राज्य सरकार क्यों नहीं करती है? यदि समूचा पुलिस बल गंगासागर मेले में है तो क्या उन दिनों किसी भी अन्य कार्यक्रम की मनाही कर देनी चाहिए?

हाइकोर्ट के निर्देश का करेंगे सम्मान :मेयर
अदालत ने यह भी कहा कि यह मेला जनता की जागरूकता के लिए होता है और इसका उद्देश्य अच्छा है. मेला आयोजन कमेटी पर कठोर नियम नहीं लादना चाहिए. इस मामले में मेयर जितेंद्र तिवारी ने कहा कि कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्णय का वे पूरा सम्मान करते हैं तथा आदेश के आलोक में बुधवार को विस्तारित कमेटी आयोजन स्थल का निरीक्षण करेगी तथा इसके बाद नगर निगम प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा.

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