कटाव रोकने के लिए पांच किलोमीटर लंबा और 25 फुट चौड़ा तटबंध बनाने की योजना
योजना पर खर्च होंगे लगभग 100 करोड़ रुपये
पायलट प्रोजेक्ट के तहत मुख्य तट पर बनी दीवार
कोलकाता/सागरद्वीप : सागरद्वीप में गंगासागर तट का कटाव लगातार जारी है. हर साल लगभग 15 मीटर समुद्र तट सागर में समाता जा रहा है. इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने यहां कंक्रीट का तटबंध बनाने का फैसला किया है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत कपिल मुनि मंदिर के ठीक सामने मुख्य तट पर कंक्रीट का तटबंध बनाया गया है.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर आने वाले वर्षों में कटाव जारी रहा तो कपिल मुनि मंदिर भी सुरक्षित नहीं रहेगा. इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने आइआइटी, मद्रास से मदद मांगी थी और आइआइटी ने कटाव रोकने के लिए कंक्रीट का तटबंध बनाने का सुझाव दिया था. इस संबंध में गंगासागर व बक्खाली उन्नयन पर्षद (जीबीडीए) के चेयरमैन बंकिम चंद्र हाजरा ने बताया कि गंगासागर तट के कटाव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने इसके बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाना आरंभ कर दिया है.
आइआइटी, मद्रास को गंगासागर तट के पास सतह के स्तर के सर्वे का जिम्मा सौंपा गया था. उन्होंने जांच की कि किस तरह से समुद्र तट कट रहा है, इसके क्या कारण हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है. इस बारे में आइआइटी, मद्रास को रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था. राज्य सरकार का प्रस्ताव मिलने के बाद आइआइटी मद्रास के विशेषज्ञों ने गंगासागर तट का सर्वेक्षण किया और उन्होंने सुझाव दिया कि गंगासागर तट के पास कंक्रीट से बने तटबंध से इसे रोका जा सकता है.
इस संबंध में आइआइटी ने प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे शहरी विकास विभाग को सौंप दिया गया था. शहरी विकास विभाग ने आइआइटी, मद्रास को इस योजना की डीपीआर तैयार करने का काम दिया गया है. श्री हाजरा ने बताया कि आइआइटी, मद्रास ने अपनी रिपोर्ट में गंगासागर तट के एक नंबर स्नान घाट से पांच नंबर स्नान घाट तक लगभग पांच किलोमीटर समुद्र तट (रूप सागर से ढेउ सागर) तक कंक्रीट तटबंध के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया है.
श्री हाजरा ने बताया कि प्राथमिक रूप में कपिल मुनि मंदिर के ठीक सामने तट पर कंक्रीट की दीवार बनायी गयी है. आइआइटी मद्रास द्वारा डीपीआर मिलने के बाद इस योजना पर पूर्ण रूप से काम शुरू किया जायेगा. इससे अगले 50 वर्षों तक गंगासागर तट पर कटाव की समस्या नहीं होगी.
