संघ की कार्यपद्धति व सोच उजागर करेगी ”द आरएसएस रोडमैप्स 21 सेंचुरी”

कोलकाता : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री सुनील अंबेकर की आगामी पुस्तक ‘द आरएसएस रोडमैप्स 21 सेंचुरी’ 21वीं सदी में संघ की कार्यपद्धति और सोच को उजागर करेगी. पुस्तक का लोकार्पण आरएसएस के सरसंघसंचालक मोहन भागवत एक अक्तूबर में नयी दिल्ली में करेंगे.... श्री अंबेकर ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 26, 2019 1:55 AM

कोलकाता : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री सुनील अंबेकर की आगामी पुस्तक ‘द आरएसएस रोडमैप्स 21 सेंचुरी’ 21वीं सदी में संघ की कार्यपद्धति और सोच को उजागर करेगी. पुस्तक का लोकार्पण आरएसएस के सरसंघसंचालक मोहन भागवत एक अक्तूबर में नयी दिल्ली में करेंगे.

श्री अंबेकर ने प्रभात खबर को बताया : पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं. रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित पुस्तक में भारत का इतिहास, संघ की स्थापना, संघ के विचार, वर्तमान व्यवस्था, वैश्विक व्यवस्था, पारिवारिक मूल्य, महिलाओं की सहभागिता, जाति व्यवस्था, अयोध्या में राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गयी है.
श्री अंबेकर कहते हैं : संघ एक राजनीतिक नहीं, सामाजिक संगठन है. संघ का उद्देश्य समाज के तंत्र को मजबूत करना है, ताकि समाज का सर्वांगीण विकास हो सके और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिल सके, लेकिन जैसे-जैसे संघ शक्तिशाली हो रहा है. संघ की शक्ति बढ़ रही है. कुछ लोगों को लग रहा है कि संघ अपनी पकड़ मजबूत बनायेगा. लेकिन संघ की कार्यपद्धति और कार्य का तरीका अलग है. वह अपनी अभिनव पद्धति के तहत पीछे रहकर कार्य करना और समाज को आगे बढ़ाने पर विश्वास करता है. 21 शताब्दी में प्रजातांत्रिक तरीके से हर प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी की सुनिश्चित करते हुए समाज को मजबूत करेगा और स्वतंत्रता के एक शतक बाद 2047 में समाज का अविभाज्य अंग बन जायेगा.
संघ की शाखाओं व प्रेरित संगठनों के अतिरिक्त बहुत से ऐसे शैक्षणिक, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन भी हैं. इनमें जातिगत संस्थाएं भी हैं. संघ का काम समाज के विकास के लिए उनके बीच समन्वय करना है, न कि उन पर कब्जा जमाना है. संघ इस तरह के संगठनों के बीच समन्वय का कार्य तेज और ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, ताकि सामाजिक बुराइयों का समाधान उनके माध्यम से हो सके.