मालदा : लोकसभा चुनाव के लिये जिला प्रशासन की सबसे बड़ी मुसीबत कर्मचारियों की कमी को लेकर है. चुनाव को सही तरीके से संपन्न कराने के लिये चुनाव आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर में भाग नहीं लेने वाले 1206 कर्मचारियों को जिला प्रशासन सह जिला चुनाव अधिकारी ने शोकॉज किया है. शोकॉज का जवाब नहीं देने पर उन कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
जिला प्रशासन का सिरदर्द बनी चुनावकर्मियों की कमी
मालदा : लोकसभा चुनाव के लिये जिला प्रशासन की सबसे बड़ी मुसीबत कर्मचारियों की कमी को लेकर है. चुनाव को सही तरीके से संपन्न कराने के लिये चुनाव आयोग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर में भाग नहीं लेने वाले 1206 कर्मचारियों को जिला प्रशासन सह जिला चुनाव अधिकारी ने शोकॉज किया है. शोकॉज का जवाब नहीं […]

उल्लेखनीय है कि मालदा जिले में चुनाव संपन्न कराने के लिये कुल 14 हजार 452 कर्मचारियों की जरूरत होगी. मालदा की दो लोकसभा सीटों के लिये कुल 2875 बूथ हैं. इनमें महिला मतदान केंद्रों की संख्या 50 है.
प्रशासनिक सूत्र के अनुसार कई विभागों में बहुत से पद खाली हैं. कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से हर साल चुनावकर्मियों की संख्या कम होती जा रही है जो चिंता का विषय है.
इससे कर्मचारियों की किल्लत देखी जा रही है. हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनैतिक दल 60 से अधिक कर्मचारियों के नाम कर्मचारियों की सूची से हटाने के लिये आवेदन नहीं कर सकते.
इस बीच 23 और 24 मार्च को चुनावकर्मियों के प्रशिक्षण आयोजित किये गये थे. उनमें 1206 कर्मचारी गैरहाजिर रहे. इन्हीं के नाम से कारण बताओ नोटिस जारी की गयी है. अभी तक इन कर्मचारियों में से 64 फीसदी कर्मचारियों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है.
जिलाधिकारी कौशिक भट्टाचार्य ने बताया कि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. हालांकि जिले में कर्मचारियों की कमी चुनाव के आयोजन में आड़े नहीं आयेगी. इस बार 15 हजार कर्मचारियों को नियुक्त किया जायेगा. इन्हीं में से 1206 ने प्रशिक्षण से किनारा कर लिया था.
उन्होंने बताया कि जिले में 50 महिला मतदान केंद्र किया गया है. इनमें से इंगलिशबाजार ब्लॉक में 26, चांचल में 10, ओल्ड मालदा में 9 और गाजोल में 5 महिला बूथ हैं. इन महिला मतदान केंद्रों के लिये 250 महिला कर्मचारियों की जरूरत होगी. उन्हें इसके लिये प्रशिक्षण दिया जायेगा.