अजय विद्यार्थी, कोलकाता : बीरभूम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष अनुव्रत मंडल के बेबाक बोल, माकपा की ऐतिहासिक विरासत और तृणमूल के सांसद अनुपम हाजरा के बागवती तेवर के बाद तृणमूल छोड़ कर भाजपा में शामिल होने और भाजपा द्वारा जादवपुर के प्रत्याशी बनाये जाने के बाद बोलपुर लोकसभा केंद्र के चुनाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं.
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अजय विद्यार्थी, कोलकाता : बीरभूम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष अनुव्रत मंडल के बेबाक बोल, माकपा की ऐतिहासिक विरासत और तृणमूल के सांसद अनुपम हाजरा के बागवती तेवर के बाद तृणमूल छोड़ कर भाजपा में शामिल होने और भाजपा द्वारा जादवपुर के प्रत्याशी बनाये जाने के बाद बोलपुर लोकसभा केंद्र के चुनाव पर सभी की निगाहें […]

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भूमि शांतिनिकेतन और विश्वभारती की ऐतिहासिक धरोहर वाला यह लोकसभा केंद्र 1967 में अस्तित्व में आया था. पहली लोकसभा चुनाव 1967 में सिर्फ एक बार ही कांग्रेस के प्रत्याशी एके चंदा विजयी हुए थे.
उसके बाद से माकपा के सारदिश राय चार बार और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सात बार सांसद निर्वाचित हुए थे. श्री राय ने 1980 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पराजित किया था, जबकि श्री चटर्जी 1984 में जादवपुर लोकसभा केंद्र में ममता बनर्जी से पराजित होने के बाद बोलपुर से 1985 में उपचुनाव में जीत हासिल की थी.
माकपा से श्री चटर्जी का खटपट होने के बाद 2009 में माकपा के प्रत्याशी डॉ रामचंद्र डोम को प्रत्याशी बनाया और वह निर्वाचित हुए, लेकिन पिछली लोकसभा चुनाव 2014 में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी अनुपम हाजरा ने डॉ डोम को पराजित कर जीत हासिल की. 2014 में माकपा के मत प्रतिशत में 19.66 फीसदी की गिरावट आयी थी, जबकि भाजपा के मतों का प्रतिशत 8.64 बढ़ा था.
लेकिन मुकुल राय के करीबी माने वाले श्री हाजरा का श्री राय के भाजपा में शामिल होने के बाद से तृणमूल कांग्रेस से रिश्ते गड़बड़ाने लगे थे तथा उनके फेसबुक पोस्ट को लेकर कई बार विवाद भी हुआ था.
अंतत: चुनाव के पहले अनुपम हाजरा ने तृणमूल छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गये. इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए विधायक असीत माल को तृणमूल कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने रामप्रसाद दास, कांग्रेस ने अभिजीत साहा और माकपा ने पूर्व सांसद डॉ रामचंद्र डोम को प्रत्याशी बनाया है.
प्रणब मुखर्जी को मिली थी हार
1980 का परिणाम
कुल मतदाता : 6,66,936
कुल मत : 4,93,812 (74.04 फीसदी)
नाम पार्टी मत प्रतिशत
सरादिश राय माकपा 2,64,798 54.97
प्रणब मुखर्जी कांग्रेस 1,96,169 40.72
केसी चट्टोपाध्याय निर्दल 8718 1.81
नारायण चंद्र मंडल निर्दल 3872 0.80
मदासुर हुसैन जनसंघ 2809 0.58
भारत के राष्ट्रपति सहित देश के कई महत्वपूर्ण मंत्रालय का प्रभार संभालने वाले भारत रत्न प्रणब मुखर्जी को भी अपने राजनीतिक जीवन के आरंभिक दिनों में लोकसभा चुनाव में पराजय का मुंह देखना पड़ा था.
लगभग पांच दशक के उनके संसदीय करियर की शुरुआत 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था.
वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के सदस्य रहे तथा भारतीय राजनीति के शीर्ष नेताओं में उनकी शुमार होती रही थी.
1980 में श्री मुखर्जी लोकसभा में सांसद निर्वाचित होने के लिए लोकसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्विता की तथा बोलपुर लोकसभा केंद्र से चुनाव लड़ा, लेकिन बोलपुर लोकसभा क्षेत्र से माकपा के दो बार के सांसद व प्रत्याशी सरादिश राय के हाथों पराजित हुए थे.
माकपा के सांसद सरादिश राय को 2,64,798 मत के साथ 54.97 फीसदी मत मिले, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव मुखर्जी को 1,96,169 यानी 40.72 फीसदी मत मिले थे और वह लोकसभा चुनाव में पराजित हुए थे, हालांकि इस पराजय के बाद वह 1981 में राज्यसभा के सांसद बनाये गये, लेकिन 2004 में श्री मुखर्जी मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर लोकसभा केंद्र से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. जंगीपुर लोकसभा केंद्र से वह पहली बार लोकसभा में प्रवेश किये थे. उसके बाद 2009 में भी फिर लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए.
सात बार सांसद रहे थे सोमनाथ चटर्जी
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी बोलपुर लोकसभा केंद्र से सात बार लगातार सांसद रहे थे. 1985 के लोकसभा उपचुनाव में वह विजयी हुए थे.
उसके बाद लगातार 2009 तक लोकसभा के सांसद रहे, हालांकि इसके पहले वह जादवपुर से सांसद रह चुके थे, लेकिन 1984 में वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथों पराजित हुए थे. उसके बाद उन्होंने बोलपुर को अपना चुनावी केंद्र बनाया और लगातार विजयी होते रहे. बोलपुर के सांसद रहते हुए ही वह लोकसभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे.
बोलपुर लोकसभा केंद्र : 2014
तृणमूल कांग्रेस : अनुपम हाजरा 630,693 वोट मिले
माकपा : डॉ रामचंद्र डोम 394,579
भाजपा : कामिनी मोहन सरकार 197,474
कांग्रेस : तपन कुमार साहा 46,953