कोलकाता : पति-पत्नी के बीच कलह को मिटाने के लिए कलकत्ता हाइकोर्ट ने बैरकपुर के रामकृष्ण मिशन के महाराज को दायित्व दिया है. बैरकपुर निवासी तारकनाथ सरकार व उनकी पत्नी वीणारानी के बीच कलह को समाप्त करने के लिए अगले तीन महीनों तक नियमित मिशन में जाकर महाराज के पास काउंसिलिंग करने का निर्देश शुक्रवार को न्यायाधीश नादिरा पाथेरिया ने दिया. साथ ही टीटागढ़ थाने की पुलिस को निर्देश दिया गया है कि बीच-बीच में दंपत्ति के पास जाकर पुलिस उनका हालचाल जाने.
निर्देश देने से पहले न्यायाधीश ने पति-पत्नी के साथ अकेले में बातचीत भी की. उल्लेखनीय है कि अपनी पुत्रवधु पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सास वेलारानी सरकार ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका आरोप था कि पुलिस ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया. मामले की सुनवाई में सास वेलारानी के बेटे तारकनाथ ने कहा था कि उनकी पत्नी वीणारानी उनकी बात नहीं सुनतीं. वह उनकी मां पर अत्याचार करती हैं. वह घर छोड़कर जाना चाहते हैं लेकिन उनकी पत्नी ऐसा नहीं चाहतीं.
न्यायाधीश ने आश्चर्य प्रकट करते हुए टीटागढ़ थाने के प्रभारी व पुत्रवधु वीणारानी को अदालत में तलब किया था. निर्देश के मुताबिक वीणारानी की वकील रिया सरकार अदालत में पहुंची. रिया के मुताबिक यह वैवाहिक समस्या का उदाहरण है. उनकी बेटी माध्यमिक परीक्षार्थी है. सास का आरोप सही नहीं है. वीणारानी ने भी पुलिस के पास उत्पीड़न की शिकायत की है.
इधर बेटे ने कहा कि उनकी मां बीमार हैं. पत्नी मां को नहीं देखती. एक अन्य दीदी को मां के पास रहना पड़ता है. न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि पारिवारिक कलह का प्रभाव घर की बेटी पर पड़ रहा है. टीटागढ़ थाने की पुलिस ने कहा कि वीणारानी ने 2015 में उत्पीड़न की शिकायत पुलिस के पास की थी. बेलारानी ने भी शिकायत की है. इसके बाद ही न्यायाधीश ने उक्त निर्देश दिया.
