बिजली लागत को युक्तिसंगत बनाने के लिए हो रहा अध्ययन

कोलकाता : वर्ष 2030 में बिजली प्रणाली की उपयुक्त लागत का निर्धारण कैसे किया जाये, इसके लिए केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीइए) ने एक अध्ययन पर काम शुरू किया है. सीइए के चेयरमैन पंकज बत्रा के अनुसार इसकी रपट एक माह के भीतर आने की संभावना है. श्री बत्रा ने कहा : हम यह तय करने […]

कोलकाता : वर्ष 2030 में बिजली प्रणाली की उपयुक्त लागत का निर्धारण कैसे किया जाये, इसके लिए केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीइए) ने एक अध्ययन पर काम शुरू किया है. सीइए के चेयरमैन पंकज बत्रा के अनुसार इसकी रपट एक माह के भीतर आने की संभावना है.
श्री बत्रा ने कहा : हम यह तय करने के लिए काम कर रहे हैं कि 2030 में बिजली के लिए एक ‘आदर्श प्रणाली लागत’ क्या होनी चाहिए. इसकी रपट एक माह के भीतर आने की उम्मीद है.
यह रपट 2030 में ग्रिड के स्थायित्व के साथ सबसे सस्ती बिजली लागत निर्धारण करने के तरीकों का पता लगायेगी और बिजली क्षेत्र के डेवलपरों का दिशा-निर्देशन करेगी. बिजली क्षेत्र के नियामकों के लिए बिजली दरें तय करने में भी यह रपट मदद करेगी.
बिजली मंत्रालय के अनुसार 2030 में देश की कुल बिजली में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 55 फीसदी होने का अनुमान है. अभी इसकी हिस्सेदारी कुल स्थापित क्षमता में 20 फीसदी है.
देश ने 2030 तक अपनी कुल स्थापित क्षमता का 40 फीसदी बिजली उत्पादन गैर-जीवाश्म ईंधन से करने का लक्ष्य तय किया है. गैर-जीवाश्म ईंधन में परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पनबिजली और पवन ऊर्जा इत्यादि शामिल है.

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