कोलकाता : फसलों का उचित मूल्य देने, श्रमिकों को सटीक न्यूनतम मजदूरी दिये जाने, समेत कई मांगों को लेकर ऑल इंडिया किसान सभा, ऑल इंडिया कृषक महासभा समेत अन्य किसान संगठनों और सीटू व कई श्रमिक संगठनों की ओर से देशभर में जेल भरो आंदोलन किया गया. इस आंदोलन का माकपा समेत अन्य वामपंथी दलों ने भी समर्थन किया.
आंदोलन के तहत महानगर समेत राज्यभर में कानून भंग किया गया. गुरुवार को सीटू की ओर से महानगर के रानी रासमणि एवेन्यू कानून भंग किया गया. इस कार्यसूची कई वामपंथी संगठनों के सदस्य व माकपा कार्यकर्ता भी सम्मिलित हुए थे. कानून भंग के तहत कोलकाता नगर निगम मुख्यालय के निकट से रैली निकाली गयी, जो रानी रासमणि एवेन्यू की ओर बढ़ने लगी.
रैली का नेतृत्व सीटू के वरिष्ठ नेता सुभाष मुखर्जी, पूर्व मंत्री व सीटू के महासचिव अनादि साहू व दीपक दासगुप्ता ने किया. रानी रासमणि एवेन्यू में पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस के साथ थोड़ी धक्का-मुक्की भी हुई.
केंद्र व राज्य सरकार की नीति समान : माकपा के प्रदेश सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने आरोप लगाया कि देश में भाजपा की सरकार और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार, जनता के हित में नहीं हैं. सीटू के वरिष्ठ नेता सुभाष मुखर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र व राज्य सरकार की नीति किसान और श्रमिक विरोधी है.
भाकपा (माले) के प्रदेश सचिव पार्थ घोष ने बताया कि किसान संगठनों के जेल भरो आंदोलन का उनकी पार्टी की ओर से भी समर्थन किया गया. बर्दवान मेें एआइकेएम के प्रदेश अध्यक्ष अन्नदा प्रसाद भट्टाचार्य के नेतृत्व में अभियान चलाया गया, जबकि हुगली मेें एआइकेएम के उपाध्यक्ष कार्तिक पाल के नेतृत्व में आंदोलन चलाया गया.
त्रस्त है देश की जनता : नवल
कोलकाता. केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ, लोकतंत्र की रक्षा की मांग व ‘मजदूर बचाओ, देश बचाओ और भाजपा हटाओ’ की मांग पर एटक की ओर से देशभर में सभा व कार्यक्रम आयोजित किये गये. महानगर समेत राज्यभर में भी कार्यसूची का पालन किया गया. गुरुवार को सियालदह स्टेशन के निकट प्रदेश एटक की ओर से सभा आयोजित की गयी थी.
प्रदेश एटक के संयुक्त सचिव कुमारेश कुंडू, वासुदेव गुप्ता, प्रदेश एटक के सचिव व परिवहन श्रमिक नेता नवल किशोर श्रीवास्तव ने सभा को संबोधित किया. सभा अपराह्न करीब 1.30 बजे से शुरू हुई थी जो शाम चार बजे समाप्त हुई. इस दौरान नवल किशोर श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की.
उन्होंने कहा कि पूरे देश का श्रमिक व किसान वर्ग केंद्र की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त है. किसानों को उनकी ऊपज की उचित कीमत नहीं मिल रही है. किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं.
