कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गयी पहल व योजनाओं से राज्य की अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति हो रही है. राज्य सरकार की पहल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. बंगाल सरकार ने पिछले चार-पांच वर्षों में अर्थ-व्यवस्था में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं. इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला है. यह बातें मंगलवार को 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने नवान्न सभाकक्ष में संवाददाता सम्मेलन में कही.
गौरतलब है कि मंगलवार को राज्य सचिवालय के पास बने नवान्न सभाकक्ष में 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल सरकार की योजनाओं की समीक्षा व क्रियान्वयन को लेकर बैठक हुई. बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं की जानकारी दी. साथ ही उन्होंने आयोग के समक्ष वाम मोरचा के शासनकाल के दौरान लिये गये कर्ज से उबारने की बात कही. मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त आयोग के चेयरमैन और आयोग के सदस्यों के साथ बैठक काफी अच्छी रही. उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि 15वें वित्त आयोग में पश्चिम बंगाल को अधिक राशि आवंटित की जायेगी.
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री सिंह ने राज्य सरकार के विभिन्न आर्थिक सुधारों की सराहना की. जिसमें कर संरचना में सुधार, आंतरिक औसत उत्पादन में वृद्धि, सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और ऑनलाइन कर संग्रह प्रणाली शुरू करना शामिल है. उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को स्थायी लाभ देंगे. उन्होंने पश्चिम बंगाल में शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य सरकार की भूमिका की सराहना की.
साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पर पिछली वाममोरचा सरकार द्वारा लिये गये ऋण को चुकाने के एवज में प्रत्येक वर्ष राज्य के राजस्व का अधिकांश हिस्सा केंद्र सरकार ले लेती है, अगर इस कर्ज का पुनर्गठन किया जाये तो यहां राज्य सरकार पूंजी खर्च को और बढ़ा पायेगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाये गये इस प्रस्ताव को वित्त आयोग ने गंभीरता से लिया है और इसे वह अपनी रिपोर्ट में पेश भी करेंगे.
उन्होंने पश्चिम बंगाल में बिजली व आधारभूत सुविधाओं के विकास क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस क्षेत्र में विकासशील योजनाओं पर कार्य जारी रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के साथ पूर्व व पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाएं हैं, साथ ही तीन देश भी बंगाल से सटे हुए हैं. बंगाल की अर्थ-व्यवस्था का असर इन राज्यों पर भी पड़ता है. इसलिए अन्य राज्यों के विकास के लिए पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था का विकास विशेष रूप से आवश्यक है.
