कोलकाता : राज्य के जूनियर डॉक्टरों की उच्च शिक्षा, एमडी, एमएस व पीजी डिप्लोमा के मामले में गत वर्ष नवंबर के बाद राज्य सरकार की ओर से निर्देश पर हाइकोर्ट के एकल पीठ ने स्थगनादेश लगा दिया था, जिसकेे खिलाफ राज्य सरकार ने हाइकोर्ट के डिवीजन बेंच पर याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश पर खंडपीठ ने अंतरिम स्थगनादेश लगा दिया है.
कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ज्योर्तिमय भट्टाचार्य की डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पर 2017 के नवंबर में हाइकोर्ट का निर्देश न मानने का आरोप लगाते हुए 139 जूनियर डॉक्टर अदालत की शरण में पहुंचे थे. राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक डॉक्टर यदि चिकित्सा परिसेवा के बदले बॉन्ड देते हैं तो उस बॉन्ड के बदले में उन्हें रिलीज कर देना चाहिए, लेकिन राज्य सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है.
उनका यह भी कहना था कि गत वर्ष नवंबर महीने में अदालत ने निर्देश दिया था कि मेडिकल के उच्च शिक्षा के मामले में डॉक्टरों को एक वर्ष राज्य के सरकारी अस्पतालों में परिसेवा देनी होगी, अन्यथा उन्हें बॉन्ड के 10 लाख रुपये चुकाने होंगे. लेकिन राज्य सरकार ने उक्त निर्देश की अवहेलना करते हुए अपना पुराना निर्देश ही बहाल रखा. यानी इस मामले में एमएस स्टूडेंट्स के मामले में तीन वर्ष की परिसेवा या 30 लाख रुपये का बॉन्ड देना होगा. पीजी डिप्लोमा के मामले में दो वर्ष की परिसेवा या 20 लाख रुपये का बॉन्ड देना होगा. उनका सवाल था कि यह बॉन्ड है या बॉन्डेज?
