पुरुलिया में सफेद पलाश के फूलों की बहार

फागुन में पूरा पुरुलिया जिला चारों ओर पलाश के पेड़ों पर खिले लाल व पीले फूलों से आच्छादित हो जाता है. दूर से देख कर लगता है कि मानो प्रकृति ने इन पेड़ों पर लाल या पीले रंग की चादर तान दी हो. लेकिन जिले के कुछ हिस्सों में आजकल लाल नहीं, बल्कि दुर्लभ श्वेत पलास के फूलों की बहार आयी हुई है.

By Prabhat Khabar News Desk | March 5, 2025 9:55 PM

पुरुलिया.

फागुन में पूरा पुरुलिया जिला चारों ओर पलाश के पेड़ों पर खिले लाल व पीले फूलों से आच्छादित हो जाता है. दूर से देख कर लगता है कि मानो प्रकृति ने इन पेड़ों पर लाल या पीले रंग की चादर तान दी हो. लेकिन जिले के कुछ हिस्सों में आजकल लाल नहीं, बल्कि दुर्लभ श्वेत पलास के फूलों की बहार आयी हुई है. सफेद पलास के फूलों की खूबसूरती देखते ही बन रही है. कुछ वर्ष पहले सैलानी यहां लाल व पीले पलाश के फूलों को देखने के लिए खिंचे चले आते थे, लेकिन अब उनके आकर्षण का सबब यहां के श्वेत पलाश के फूल हो गये हैं. श्वेत पलाश के फूलों के बारे में जैसे-जैसे लोगों को पता चल रहा है, उसे करीब से देख कर जानने-समझने के लिए लोग यहां आने लगे हैं. वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 15 सफेद पलास के पेड़ पाये गये हैं. जिले के हुडा, पुंचा, बांदवान, बलरामपुर, बाघमुंडी, रघुनाथपुर और अयोध्या पहाड़ में सफेद पलास के पेड़ पाये गये हैं. इन पेड़ों पर खिले सफेद फूलों की शोभा बरबस ही लोगों का ध्यान खींच रही है. इन पेड़ों को बचाने व सहेजने के लिए इन दिनों जिला प्रशासन एवं वन विभाग सक्रिय हो गये हैं. आधुनिक पद्धति से इन पेड़ों की संख्या बढ़ाने पर जिला प्रशासन कार्य कर रहा है, ताकि इसे जिला में जगह-जगह लगाया जा सके. श्वेत पलास को देखने के लिए सैलानी व शोधार्थी पुरुलिया पहुंचने लगे हैं. इस संबंध में पुरुलिया सिदो कान्हू बिरसा विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुब्रत राहा ने बताया कि वर्ष 2023 में पहली बार पुरुलिया के आड़शा प्रखंड के एक शिक्षक ने श्वेत पलासक यानी सफेद पलास के पेड़ की जानकारी दी थी. उसके बाद से ही इस पेड़ के वैज्ञानिक पहलुओं पर शोध होने लगा. प्राथमिक रूप से पता चला कि सफेद पलास फूल से कई तरह की औषधियां बनायी जाती हैं, जो दुर्लभ रोग-विकार को दूर करने में कारगर हैं. दावा तो यहां तक है कि कैंसर जैसे घातक मर्ज के इलाज में भी श्वेत पलास फूल से बनी दवाएं उपयोगी हैं. हालांकि इस पर अभी शोधकार्य पूरा होना बाकी है. इन दिनों श्वेत पलास के पेड़ को बचाने की पहल चल रही है. इस पेड़ को अधिकाधिक कैसे लगाया जाये, इसके प्रभावी तरीकों पर भी शोध किया जा रहा है. सबकुछ ठीक रहा, तो निकट भविष्य में श्वेत पलास के ढेर सारे पेड़ जिले में दिखेंगे. मिली जानकारी के अनुसार यह पेड़ बस पुरुलिया जिले में ही पाया गया है. इन पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन लोगों में जागरूकता फैला रहे हैं, ताकि इन पेड़ों को कोई क्षति ना पहुंचाये.

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