कोयला मंत्रालय को भेजा गया संशोधित पुनर्वास पैकेज, मंजूरी के बाद शिफ्ट होंगे लोग

समीक्षा. रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना को लेकर मंत्री मलय घटक ने की उच्चस्तरीय बैठक

कुल 146 बस्तियों के लोगों को करना है शिफ्ट, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2009 में बना था मास्टर प्लान स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ी पुनर्वास योजनाओं में एक है यह, खनन प्रभावित हजारों परिवारों को सुरक्षा, सुविधा व सम्मानजनक जीवन देना है लक्ष्य आसनसोल. पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी (डीएम) पोन्नमबलम.एस ने कहा कि रानीगंज कोलफील्ड एरिया (आरसीएफए) पुनर्वास परियोजना को लेकर संशोधित पैकेज तैयार करके कोयला मंत्रालय को भेजा गया है. पैकेज की मंजूरी मिलते ही लोगों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. वर्ष 2009 में जो मास्टरप्लान बना था, उस समय तैयार पैकेज संशोधित करके भेजा गया है. पैकेज की मंजूरी मिलते ही कौन सी बस्ती के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पहले शिफ्ट किया जाएगा? इसकी सूची इसीएल तैयार करके देगी. जिला में तीन लोकेशन बाराबनी, अंडाल और जामुड़िया में 10 हजार फ्लैटों का निर्माण हो रहा है. जिसमें से चार हजार फ्लैट रेडी है. संभावना है आगामी दो माह के अंदर संशोधित पैकज को मंजूरी मिल जाएगी. जिसके बाद तुरंत लोगों को शिफ्ट करने का कार्य शुरू होगा. शनिवार को इन्ही विषयों को लेकर राज्य के श्रम, विधि व न्याय मंत्री मलय घटक की उपस्थिति में आसनसोल सर्किट हाउस में एक समीक्षात्मक बैठक हुई. बैठक में मंत्री श्री घटक के साथ पश्चिम बर्दवान जिला परिषद के सभाधिपति विश्वनाथ बाउरी, रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी, जामुड़िया के विधायक हरेराम सिंह, पांडवेश्वर के विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती, आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन कवि दत्ता, जिलाधिकारी पोन्नमबालम.एस, आसनसोल सदर के महकमा शासक विश्वजीत भट्टाचार्य आदि उपस्थित थे. गौरतलब है कि भूमिगत आग और भू-धंसान के कारण असुरक्षित हुए क्षेत्रों में से 146 बस्तियों में बसे परिवारों को सुरक्षित जगहों पर बसाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2009 में तैयार रानीगंज कोलफील्ड एरिया (आरसीएफए) पुनर्वास परियोजना का मास्टरप्लान बना था. 2661.73 करोड़ रुपये की यह परियोजना बनी. दस साल में इस परियोजना को पूरा होना था, लेकिन अनेकों प्रकार की अड़चनों के कारण यह परियोजना छह साल विलंब से चल रहा है. अबतक किसी भी बस्ती के लोगों को शिफ्ट नहीं किया जा सका है. कुछ लोगों को शिफ्ट किया गया था, लेकिन वे वहां से वापस लौट आये. जो फ्लैट बने हैं, वह धूल फांक रहा है. काफी सामान चोरी हो चुकी है. आजादी के बाद सबसे बड़ी पुनर्वास परियोजनाओं में से एक आरसीएफए पुनर्वास परियोजना को पूरा करने में देर होने से लागत में भी बढ़ोतरी हो गयी है और पुनर्वास पैकेज भी वर्तमान समय के हिसाब से काफी पुराना हो चुका है. ऐसे में इस पैकेज को लेकर लोग वहां जाने को तैयार नहीं है. जिसे लेकर संशोधित पैकेज तैयार करके मंजूरी के लिए भेजा गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >