बीरभूम से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट
WB Crime News: पूर्व रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्टेशन से खुद को यात्रा टिकट परीक्षक (TTE) बताकर यात्रियों और रेलकर्मियों को चूना लगाने वाले शातिर युवक को दबोचा है. आरोपी के कब्जे से फर्जी रेलवे पहचान-पत्र (ID Card), नकली टिकट जांच प्राधिकरण पत्र और कई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किये गये हैं. कड़ाई से पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने जेमिनी एआई (Gemini AI) टूल की मदद से असली दिखने वाले फर्जी दस्तावेज तैयार किये थे.
तड़के 3:15 बजे आरपीएफ को हुआ संदेह
यह पूरी कार्रवाई बृहस्पतिवार तड़के करीब 3:15 बजे हुई, जब आरपीएफ की टीम रामपुरहाट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर नियमित गश्त और निगरानी पर थी. गश्त के दौरान ड्यूटी पर तैनात सहायक उप-निरीक्षक (ASI) की नजर टीटीई की वर्दी में घूम रहे इस युवक पर पड़ी.
पहचान पत्र की बनावट और फॉन्ट में विसंगतियां
आरपीएफ ने पूछताछ की, तो युवक ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि वह सियालदह मंडल (Sealdah Division) में कार्यरत टीटीई है. उसने अपनी जेब से एक लैमिनेटेड रेलवे आईडी कार्ड भी दिखाया. हालांकि, पहचान-पत्र की तकनीकी बनावट और फॉन्ट में विसंगतियां मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ. इसके बाद उसे तत्काल मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) कार्यालय ले जाकर गहनता से पूछताछ की गयी, तो उसकी पोल खुल गयी.
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उत्तर 24 परगना जिले का है आरोपी आर्यदीप साहा
आरोपी की पहचान उत्तर 24 परगना जिले के निवासी आर्यदीप साहा के रूप में हुई. बाद में उसने कबूल किया कि वह रेलवे का कर्मचारी नहीं है. वह सियालदह से 13153 अप गौड़ एक्सप्रेस में फर्जी टीटीई बनकर यात्रियों के टिकट चेक करता हुआ रामपुरहाट पहुंचा था. स्टेशन पर उतरने के बाद भी वह खुद को रेलवे अधिकारी बताकर यात्रियों और प्लेटफॉर्म कर्मियों पर रौब झाड़ रहा था.
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AI की मदद से बनायी नकली आईडी
आरपीएफ ने आरोपी के बैग की तलाशी ली, तो उसमें से 2 फर्जी रेलवे पहचान-पत्र (Fake Railway IDs), 1 नकली टिकट चेकिंग अथॉरिटी (TCA) लेटर, 2 एटीएम कार्ड, नकदी से भरा मनी बैग और 1 स्मार्टफोन मिला. मोबाइल की गैलरी जांचने पर कई स्टेशनों और ट्रेन के कोचों में टिकट जांच करते हुए उसकी तस्वीरें मिलीं, जिससे स्पष्ट हुआ कि वह लंबे समय से इस फर्जीवाड़ा में लिप्त था. उसने बताया कि उसने Gemini AI जैसे आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से नकली आईडी का डिजाइन तैयार किया था, ताकि किसी को शक न हो.
सैंथिया जीआरपी के हवाले आरोपी
आरपीएफ ने सभी बरामद सामान की वीडियोग्राफी कराकर उन्हें जब्त कर लिया. फिर सियालदह तथा हावड़ा आरपीएफ मुख्यालय से इसका सत्यापन कराया. दोनों मुख्यालयों ने पुष्टि की कि आर्यदीप साहा नाम का कोई भी कर्मचारी रेलवे में कार्यरत नहीं है. इसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए सैंथिया सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को सौंप दिया गया. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने यात्रियों को ठगा है और क्या इस फर्जीवाड़े में कोई बड़ा सिंडिकेट शामिल है.
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और विश्वास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. यात्रियों से अपील है कि यदि किसी भी टिकट चेकिंग स्टाफ की गतिविधि या पहचान पत्र संदिग्ध लगे, तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आरपीएफ को सूचित करें. - शिबराम माझी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्व रेलवे
