भाजपा के विरोध मार्च को पुलिस ने रोका
पार्टी नेताओं ने कहा कि पुलिस और तृणमूल की मिलीभगत से भाजपा को सड़कों पर उतरने से रोका जा रहा है.
प्रदर्शनरत भाजपाइयों पर काबू पाने में पुलिस के छूटे पसीने बांकुड़ा. जिले में मंगलवार को भाजपा की ओर से आयोजित विरोध मार्च और प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण माहौल तनावपूर्ण रहा. यह कार्यक्रम आदिवासी नेता एवं सांसद खगेन मुर्मू पर कथित तृणमूल समर्थकों के हमले और दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के विरोध में आयोजित किया गया था. डीएम ऑफिस के पास पुलिस की घेराबंदी से भड़के भाजपाई : विरोध मार्च हिंदू स्कूल मैदान से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ा. जुलूस में बांकुड़ा जिले के कई भाजपा विधायक, जिला नेतृत्व और संगठनात्मक जिला अध्यक्ष शामिल थे. डीएम कार्यालय पहुंचने से पहले ही पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर मार्च को रोक दिया. इससे भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे और वहीं विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रशासन और राज्य सरकार विपक्षी दल के लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है. पार्टी नेताओं ने कहा कि पुलिस और तृणमूल की मिलीभगत से भाजपा को सड़कों पर उतरने से रोका जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस दमनकारी नीति के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और हर जिले में आंदोलन होगा.
भाजपा का आरोप, आदिवासी विरोधी है तृणमूल
पूर्व केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ सुभाष सरकार ने कहा कि सांसद खगेन मुर्मू पर हुआ हमला सत्ताधारी दल की गुंडागर्दी का परिणाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस आदिवासी विरोधी नीति अपना रही है और इसे बंगाल की सत्ता से हटाना ही भाजपा का लक्ष्य है. उन्होंने दुर्गापुर की घटना पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कथित निष्क्रियता को कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का कारण बताया.भाजपा के बांकुड़ा सांगठनिक जिलाध्यक्ष प्रसेनजीत चटर्जी ने कहा कि आदिवासी नेता पर हमला और मेडिकल छात्रा से दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर पूरे राज्य में प्रतिवाद जारी है. इसी के तहत जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया. उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार कन्याश्री योजना की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है. भाजपा नेता मुन्ना चक्रवर्ती ने कहा कि शांतिपूर्ण जुलूस को बिना कारण रोका गया, जबकि प्रदर्शन का उद्देश्य केवल न्याय की मांग करना था.
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