एक हजार से अधिक लोगों ने आसनसोल में तोड़ा कानून, गिरफ्तारी दी

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आसनसोल में वामपंथी संगठनों का जेल भरो आंदोलन. 1000 से अधिक लोगों ने गिरफ्तारी दी. मीनाक्षी मुखर्जी ने संविधान और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठायी.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केंद्रीय कमेटी की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार श्रमिक, किसान, खेत मजदूर, बस्तीवासी, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, हॉकरों पर अत्याचार कर रही है. राज्य की सत्ता में आते ही भाजपा के अत्याचार से जनता त्राहिमाम कर रही है.  मेहनतकश लोगों के सामने रोजगार, राशन, महंगाई और जीवन-यापन से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं. कोलियरियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रोजगार का संकट बढ़ रहा है, जबकि हाकरों, बस्तियों में रहने वाले लोगों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई नहीं है, बल्कि आम लोगों के साथ संविधान को बचाने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की लड़ाई है. जब लोगों के सामने अपनी मांगें रखने के रास्ते सीमित किये जाते हैं, तब आंदोलन ही उनके पास अपनी आवाज बुलंद करने का लोकतांत्रिक माध्यम बचता है. सोमवार को आसनसोल में वामपंथी श्रमिक संगठनों के जेल भरो आंदोलन के दौरान सभा को संबोधित करते हुए सुश्री मुखर्जी ने ये बातें कहीं. इस कार्यक्रम में 1000 से अधिक लोगों ने कानून भंगकर अपनी गिरफ्तारी दी, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. चार श्रम कोड को वापस लेने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों के निजीकरण पर रोक, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, ग्रामीण रोजगार योजना के दायरे को बढ़ाने आदि मांगो के समर्थन में देशभर में वामपंथी श्रमिक संगठनों का जेल भरो आंदोलन कार्यक्रम के तहत सोमवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे बीएनआर मोड़ से श्रमिक संगठनों की रैली निकली.

इसमें युवा, छात्र, महिला, किसान, खेत मजदूर, हॉकर, बस्ती के लोग शामिल रहे. यह रैली भगत सिंह मोड़ से पुलिस लाइन की ओर बढ़ते ही पुलिस ने रोक दिया. पांच बैरिकेड लगाया गया था. तीन वैरिकेड को तोड़ने के बाद पुलिस ने लोगों को पकड़ना शुरू किया और सभी ने अपनी गिरफ्तारी दी. पुलिस बस में सवार हो गये. कुछ दूर ले जाकर पुलिस ने सभी को जमानत पर रिहा कर दिया.

प्रदर्शन के दौरान सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और रंगकर्मियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए. प्रदर्शनकारियों ने सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखने की मांग की.


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By Shiv shankar thakur

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