प्रतिनिधि, बांकुड़ा जिले के विभिन्न इलाकों में हाथियों के झुंड द्वारा फसलों को रौंदे जाने से किसानों में दहशत फैल गयी है. खेतों में लगी धान और सब्जियों की फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं. इस संकट से निपटने के लिए ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए गहरी आस्था के साथ गज लक्ष्मी जी की पूजा कर रहे हैं, ताकि फसलों को इन हमलों से बचाया जा सके. कर्ज लेकर बोयी फसलें भी हाथियों ने रौंदी: ग्रामीणों का कहना है कि एक बार भारी बारिश से फसलें पहले ही नष्ट हो चुकी थीं. अब दोबारा कर्ज लेकर फसल लगाने के बाद हाथियों ने उसे भी बर्बाद कर दिया. बांकुड़ा उत्तर वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में बरजोड़ा क्षेत्र में 66 हाथी मौजूद हैं, जिनमें से 58 सहारजोड़ा, एक राधुरबैद और सात चक पतरासयार इलाके में हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि भोजन की तलाश में ये हाथी रात के समय खेतों और बस्तियों में प्रवेश करते हैं, जिससे उन्हें हर रात भय में जीना पड़ता है. सारेंगा में हाथियों का कहर, वन विभाग से असंतुष्ट किसान जंगलमहल क्षेत्र का सारेंगा इलाका भी हाथियों के उत्पात से परेशान है. पिछले सप्ताह 22 से 25 हाथियों का झुंड पश्चिम मिदनापुर के गोआल्टोर से करभंगा और कोइमा होते हुए सारेंगा दक्षिण वन प्रभाग के हातिबारी, सारुलिया, बामनीशोल और बेलडांगा इलाकों में घुस आया. हाथियों ने धान, करेला, झींगा और कद्दू जैसी फसलों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया. प्रभावित किसानों ने वन विभाग की उदासीनता पर नाराजगी जताई. उनका कहना है कि कर्ज लेकर फसल उगाने के बावजूद विभाग ने मात्र पांच सौ रुपए का मुआवजा दिया, जिससे उन्हें कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े. सारेंगा पंचायत के वन व भूमि अधिकारी शेखर राउत ने स्वीकार किया कि किसान मुआवजे से असंतुष्ट हैं. वहीं, गोपबंदी गांव में ग्रामीणों ने पारंपरिक ‘गज लक्ष्मी पूजा’ की शुरुआत की है. लगभग 250 वर्षों से चली आ रही यह पूजा कोजागरी पूर्णिमा से आरंभ होकर पांच दिनों तक चलती है, जिसके जरिये ग्रामीण फसलों को हाथियों के हमलों से बचाने की प्रार्थना करते हैं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
