पानागढ़ : बीरभूम जिले के जयदेव केंदुली स्थित अजय नदी में बुधवार सुबह कदम खंडित घाट पर लाखों पूर्णार्थियो ने डुबकी लगायी. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किये गये थे. जगह जगह सीसीटीवी कैमरा, अग्निशमन सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था किये गये थे. गौरतलब है कि नदी के किनारे गीत गोविंद के रचयिता कवि जयदेव का जन्म स्थान है.
अनेक विद्वानों का कहना है कि उनका जन्म स्थान ओडिशा के केंदुली श्मशान में हुआ था. यह चर्चा का विषय है. इसके बावजूद लाखों पुण्यार्थियों का समागम कवि जयदेव की इस पावन भूमि पर प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति से शुरू होकर करीब 10 दिनों तक चलता रहता है.
ऐसा मानना है कि देवी गंगा ने सपने में कवि जयदेव को कहा था कि केंदुली के अजय नदी स्थित कुंडली घाट पर कमल का फूल तैरता हुआ दिखायी दे, तो समझ लेना मैं स्वयं यहां आयी हूं. बताया जाता है कि प्रातः सूर्य की पहली किरण के निकलते ही जयदेव अपने साथ कुछ ग्रामीणों को लेकर उक्त घाट पर पहुँचे. देखा कि घाट पर कमल का फूल अजय नदी में तैरता हुआ आ रहा.
तभी से अजय नदी को गंगा का स्वरूप मानकर प्रति वर्ष यहां मकर संक्रांति के रुप से पूजन की विधि शुरू हो गयी. मकर संक्रांति में अजय नदी के उक्त घाट पर गंगा स्नान अथवा पूर्ण स्न्नान होना आरम्भ हो गया. 1982 में बीरभूम जिला प्रशासन ने मेला का शुरुआत किया. पहले पहल 107 अखाड़े यहां लगते थे.
वर्तमान में 300 से ज्यादा अखाड़ा यहां लग रहा हैं. बाउल, कीर्तन ,लोक गीत आदि अखाड़े यहां लगते हैं. बाउल, लोक, कीर्तनिया गायकों का समागम यहां देखने लायक है. रात भर शीत लहरी व कड़ाके की ठंड के बावजूद नदी किनारे बने हजारों अखाड़ों में उक्त गायकों की टीम अपनी अपनी रचनाओं को सुना रहे हैं.
