इसीएल की राजमहल परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी
सांकतोड़ीया : ईसीएल अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक प्रेम सागर मिश्रा ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में कोयला की उपयोगिता बनी रहेगी. कोयला के आयात को कम से कम करने तथा 100 प्रतिशत गुणवत्ता वाले कोयले का उत्पादन प्रमुख चुनौती है. कोल ब्लॉकों के विकास एवं कोयला उत्पादन को लेकर सरकार की ओर से उठाये गये कदम सराहनीय हैं. कोल ब्लॉकों के आवंटन व जल्द उत्पादन पर जोर देने की आवश्यकता है.
आनेवाले समय में कोयला उद्योग अपनी ऊंचाइयों पर होगा. उन्होने कहा कि हार कर जीतनेवाले ही बाजीगर होते हैं. विनर बनने के लिए स्वयं को बदलना होगा. बदलते माहौल के अनुसार नॉलेज, तकनीक को अपनाना होगा. उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादन के साथ वैल्यू एड के रूप में भी कुछ न कुछ करना होगा. सीबीएम, सीएमएम, कोल गैसीफिकेशन जैसे कई स्रोत हैं. भूमिगत उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है. इसके बिना आगे चलना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि ईसीएल की राजमहल परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल गयी है. उक्त प्रोजेक्ट के विस्तार से संताल परगना कोयला उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन जायेगा. इस प्रोजेक्ट से 24 मिलियन टन कोयला उत्पादन होगा. पिछले साल राजमहल प्रोजेक्ट से 17 मिलियन टन कोयला का उत्पादन हुआ था. प्रोजेक्ट के विस्तार से उत्पादन क्षमता 23.8 मिलियन टन के करीब हो जायेगी.
पर्यावरण स्वीकृति के बाद प्रोजेक्ट विस्तार के काम में तेजी आयेगी. उन्होनें कहा की देश में कोयले की निर्भरता कम होने वाली नहीं हैै. कोल इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी कोल कंपनी हैै लेकिन इसका मुनाफा दुनिया की अन्य अपेक्षाकृत कई छोटी कंपनियों से काफी कम हैै. इसका कारण यह है कि हम बदलते जमाने के साथ नहीं चल रहे हैं.
