बांकुड़ा : बांकुड़ा में शिक्षा के विकास, सामाजिक सरोकार व आर्थिक विकास में लंबे समय से मारवाड़ी समाज की अग्रणी भूमिका रही है. इसका जीता जागता उदाहरण बांकुड़ा शहर का गोयनका विद्यायतन है.
उन्हीं में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए जाने जाते हैं बांकुड़ा के मोहनलाल गोयनका. पूर्व गांधीवादी कांग्रेसी नेता मोहनलाल गोयनका ने वर्ष 1945 में गोयनका विद्यायतन की नींव रखी थी. उसी वर्ष शहर से दूर मधुबन ग्राम में मधुबन गोयनका नाम से स्कूल की स्थापना की थी. इसके बाद ही वर्ष 1947 में इंदपुर एवं हरिग्राम में भी गोयनका हाई सेकेंडरी स्कूल का निर्माण कराया था.
उपरोक्त चारों विद्यालय गोयनका विद्यायतन के नाम से ही जाना जाता है. बताया जाता है कि देश की आजादी के पहले से ही मोहनलाल गोयनका ट्रस्ट की आर्थिक सहायता से विद्यालय चलाया जाता था. इसके अलावा मधुबन ग्राम के आदिवासी किशोरों एवं युवाओं में मोहनलाल जी ने जिस तरह से उच्च शिक्षा की भावना पैदा की थी वैसे ही भावना बांकुड़ा शहर के गोयनका विद्यायतन में मारवाड़ी समुदाय के बच्चों के लिए भी की थी जहां उच्च शिक्षा के लिए उत्साह पैदा किया था.
वैसे तो मोहन लाल गोयनका एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यकित थे. यही वजह है कि गोयनका विद्यायतन की दीवारों पर गीता के श्लोक अंकित हैं. इतिहास गवाह है कि शुरुआती दौर से ही विद्यालय में गीता पाठ एवं भक्त प्रहलाद का पाठ पढ़ाया जाता था. यहां परीक्षा लेने का जो नियम था, वह 80 के दशक में बंद हो गया.
मोहनलाल गोयनका भारतीय संस्कृति के वातावरण में उच्च शिक्षा के लिए सैदव प्रयत्नशील थे. राजस्थान के बीकानेर जिला के चुरू से व्यवसाय करने के उद्देश्य से मोहनलाल गोयनका अपने बड़े भाई जयदयाल के साथ बांकुड़ा आये थे. जयदयाल जी की कोई संतान नहीं होने के चलते उन्होंने मोहनलाल जी को गोद लिया था. व्यवसाय के अलावा सामाजिक कार्यो में उनका योगदान भी आज भी अविस्मरणीय है.
वर्ष 1927 में वे भारतीय कांग्रेस से जुड़ गये थे. वर्ष 1928 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में तथा वर्ष 1929 में लाहौर में खादी वस्त्र का स्टॉल लगाया था. उसके बाद वे कांग्रेस नेता गोविंद प्रसाद सिंह के संपर्क में आये. गोविंद प्रसाद सिंह के सानिध्य में खादी उत्पादन का जिम्मा उठाया. इसके लिए इंदपुर में उत्पादन का कार्य सम्भाला. इसके अलावा उन्होंने शहर के कुचकुचिया में गंजी बनाने का कारखाना लगाया.
इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना था. गोयनका विद्यायतन की शुरुआत से ही छात्रों ने बांकुड़ा गोयनका विद्यायतन का नाम उज्ज्वल किया है और आज भी वे कर रहे हैं. विद्यायतन के प्रधानाध्यापकों में एक नगेन्द्र नाथ मुखोपाध्याय थे, जो मां शारदा के मंत्र शिष्य थे. उनके जीवन दर्शन, प्रशासनिक भूमिका और शिक्षा दान तत्कालीन छात्र जगत एवं समाज को प्रेरित किया है. आज भी लोग इसे याद करते हैं. साथ ही विद्यायतन के प्रधानाध्यापक कालीपद बंदोपाध्याय के अलावा पूर्व नगर पालिका चेयरमैन दिलीप कुमार चट्टोपाध्याय मेधावी छात्रों में शामिल थे.
मेधावी छात्रों में मोहनलाल के पुत्र माधव प्रसाद गोयनका , विशिष्ट व्यवसायी सत्यनारायण गोयनका, विष्णु प्रसाद बाजोरिया, मधुसूदन सुरेका, देवकीनंदन पोद्दार , देवी प्रसाद बंद्योपाध्याय, यादव मंडल , अर्धेंदु शेखर चक्रवर्ती, डॉ मुरली मोहन दास, डॉ. नीलरतन कुंडू, डॉ. सुदेब सिन्हा, डॉ श्यामसुंदर कुंडू, डॉ गिरीन्द्र शेखर चक्रवर्ती , ओंदा विधानसभा के विधायक अरुप खां, बांकुड़ा नगरपालिका के उपाध्यक्ष दिलीप अग्रवाल तथा हिंदी दैनिक प्रभात खबर के एमडी कमल कुमार गोयनका प्रमुख हैं.
जिन्हें लेकर आज भी बांकुड़ा गोयनका विद्यायतन गौरव अनुभव करता है. यहां के और भी ऐसे छात्र हैं, जो आज भी देश के कोने-कोने में तथा विदेशों में बड़े पदों पर आसीन हैं. जो देश, राज्य एवं जिले का नाम रोशन कर रहे हैं. बता दें कि बांकुड़ा गोयनका विद्यायतन इस वर्ष अपना प्लेटिनम जुबली वर्ष मना रहा है. इसे लेकर बीस से बाइस दिसंबर तक आयोजित समारोह में विद्यालय के स्थापना दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पूर्व शिक्षकों व छात्रों को सम्मानित किया जायेगा. इसकी तैयारी जोरशोर से चल रही है.
