जर्जर भवन में प्राइमरी के बच्चों को पढ़ने की विवशता

आसनसोल :साउथ धदका पोलिटेक्निक कॉलेज परिसर स्थित आसनसोल पोलिटेक्निक एफपी स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण स्टूडेंटस व शिक्षकों को आतंक के साये में अध्ययन-अध्यापन करना पड़ रहा है. बाउंड्री वॉल न होने के कारण स्टूडेंटस और शिक्षिकाओं में हमेशा असुरक्षा की भावना रहती है. टिफिन के दौरान छोटे-छोटे बच्चे स्कूल के बाहर दूर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 7, 2018 1:41 AM
आसनसोल :साउथ धदका पोलिटेक्निक कॉलेज परिसर स्थित आसनसोल पोलिटेक्निक एफपी स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण स्टूडेंटस व शिक्षकों को आतंक के साये में अध्ययन-अध्यापन करना पड़ रहा है. बाउंड्री वॉल न होने के कारण स्टूडेंटस और शिक्षिकाओं में हमेशा असुरक्षा की भावना रहती है. टिफिन के दौरान छोटे-छोटे बच्चे स्कूल के बाहर दूर तक खेलने चले जाने से कभी भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है. बरसात के दौरान पोलिटेक्निक कॉलेज के मैदान का पानी स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पठन पाठन बाधित होता है.
स्कूल में पांच शिक्षिकाएं तथा 96 स्टूडेंटस हैँ. स्कूल की प्रभारी शिक्षिका जुलू मंडल ने कहा कि स्कूल का नया भवन जल्द बनेगा. पुराने भवन में पर्याप्त स्थान न होने से स्टूडेंटस को पठन पाठन में परेशानी होती है. कमरे न होने के कारण एक ही कक्षा में प्री- प्राइमरी और कक्षा एक दोनों कक्षाओं के स्टूडेंटसों को पढ़ाने से पर्याप्त स्थान न होने से परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि स्कूल कमेटी के अध्यक्ष सह निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी के स्तर से हर संभव सहयोग मिल रहा है.
स्कूल के नये भवन निर्माण को लेकर उनके स्तर से प्रयास किया जा रहा है. संध्या समय स्थानीय शरारती लोग स्कूल के पानी टंकी का ढक्कन फेंक देते हैँ. जिसे सुबह उठाकर वापस लाना पडता है. शरारती लोगों द्वारा पानी में किसी प्रकार की मिलावट की आशंका को देखते हुए टंकी के पानी उपयोग नहीं किया जाता है. शेड न होने के कारण गर्मियों में चिलचिलाती धूप में सुबह खुले में स्टूडेंटस को प्रार्थना के लिए खडा करने से स्टूडेंटस को परेशानी होती है.
चेयरमैन श्री चटर्जी ने कहा कि स्कूल का नया भवन जल्द ही बनाया जायेगा. नगर निगम के बोर्ड की बैठक में स्कूल भवन बनाने का प्रस्ताव पास कर लिया गया है. 18 लाख की लागत सेस्कूल भवन बनाया जायेगा और पांच लाख रूपये मिड डे मील के लिए स्वीकृत किये गये हैँ.