षष्ठी तैयारियां जोरों पर, ससुराल पहुंचने लगे जमाई
दुर्गापुर : बांग्ला संस्कृति में जमाई षष्ठी पर्व की एक अलग पहचान है. बंगाल सहित देश के उन सभी हिस्सों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जहां बांग्लाभाषी रहते हैं. दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में जमाई जमाई षष्ठी पर्व को लेकर बंगाली समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. इस […]
दुर्गापुर : बांग्ला संस्कृति में जमाई षष्ठी पर्व की एक अलग पहचान है. बंगाल सहित देश के उन सभी हिस्सों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जहां बांग्लाभाषी रहते हैं. दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में जमाई जमाई षष्ठी पर्व को लेकर बंगाली समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. इस दिन को लेकर बंगाली घरों में जोर-शोर से तैयारियां की जा रही है. घरों की साफ-सफाई के साथ-साथ तरह-तरह के पकवान बनाने की तैयारी चल रही है. पर्व को लेकर शहर के बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है. फलों और मछलियों की मांग बढ़ गई है. कीमतों में भी काफी चढ़ाव दिख रहा है.
ज्ञात हो कि जमाई षष्ठी में भगवान षष्ठी की पूजा होती है. इसमें दामाद को भगवान का रूप दिया जाता है. ससुराल वाले दामाद के हाथ में रक्षासूत्र बाध उनकी लंबी आयु की कामना करते हैं. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बंगाली समुदाय में जमाई षष्ठी मनाई जाती है. इस पर्व के मद्देनजर बंगाली समुदाय की महिलाएं सुबह पीपल वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना कर जमाई के दीर्घायु होने की कामना करती हैं. यह समय गर्मी का है. ऐसे में जमाई को कोई परेशानी न हो, इसके लिए हाथ का पंखा हिलाकर मौसमी फल और तरह-तरह के पकवान खाने को दिये जाते हैं. बंगाल की प्रसिद्ध मिष्टी दही और माछ तो खाया ही जाता है और उसे आस-पास के लोगों में बाटा भी जाता है.
किसी भी उम्र का दामाद क्यों न हो, ससुराल पक्ष नए वस्त्र और विभिन्न प्रकार की फल, मिठाइया और माछ लेकर उनका स्वागत करता है. इसके बाद परिवार के सभी सदस्य साथ में भोजन करते हैं. शहर में बंगाली समाज में जमाई राजा की खातिरदारी का क्रेज बढ़ा है. बंग समाज के घर-घर में दूल्हे राजा की सेवा के लिए जमाई षष्ठी मनाई जाती है. इस दिन का दामादों को सालभर इंतजार रहता है. शहर की बेटिया भी अपने मायका आने को बेकरार रहती हैं.
पर्व को लेकर दूरदराज के इलाके में रहने वाली बेटियों और जमाईयों का अपने ससुराल आना शुरू हो गया है. इस बाबत संजय पाल, आशीष चौधरी, असीम चटर्जी बताते हैं कि जमाई षष्ठी पर खातिरदारी की अलग खुशी होती है. मां और सास का आशीर्वाद सुखद अहसास देता है. उन्होंने बताया कि सास दामाद के स्वागत में उपवास रहेंगी. पांच तरह की मिठाई, फल और मछली के पकवान परोसेंगी.
