आलू राज्य से बाहर भेजने पर रोक

कोलकाता: आलू के लिए सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों में इसे लेकर हाहाकार मचा हुआ है, क्योंकि पूर्वी भारत के प्राय: सभी राज्यों में आलू की आपूर्ति पश्चिम बंगाल से ही होती है. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि किसी भी कीमत बंगाल से […]

कोलकाता: आलू के लिए सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों में इसे लेकर हाहाकार मचा हुआ है, क्योंकि पूर्वी भारत के प्राय: सभी राज्यों में आलू की आपूर्ति पश्चिम बंगाल से ही होती है. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि किसी भी कीमत बंगाल से उत्पादित आलू को बाहर राज्यों में भेजा नहीं जा सकता है. राज्य के आलू को यहीं रखना होगा. सबसे पहले राज्य की मांग पूरी करनी होगी, उसके बाद बाहर के राज्यों के बारे में सोचा जायेगा.

गौरतलब है कि आल की मांग करते हुए असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई व ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को भी ठुकरा दिया.

गौरतलब है कि बंगाल में प्रत्येक वर्ष 110-120 लाख टन आलू का उत्पादन होता है, जबकि यहां की खपत मात्र 60 लाख टन आलू है. इसलिए बाकी आलू को राज्य के बाहर भी निर्यात किया जाता है. आलू के लिए पूर्वी भारत के कई राज्य बंगाल पर ही निर्भर हैं, लेकिन राज्य से वहां आलू निर्यात नहीं करने पर वहां भी आलू के लिए हाहाकार मच गया है.

फैसले से व्यवसायी नाखुश
राज्य सरकार के इस फैसले व्यवसायी काफी नाखुश हैं. उनका कहना है कि राज्य के सभी कोल्ड स्टोरेज को मिलाकर यहां अभी भी करीब 16 लाख टन आलू है और राज्य में प्रत्येक महीने पांच लाख मेट्रिक टन आलू की खपत होती है. मुख्यमंत्री ने 30 नवंबर तक सभी कोल्ड स्टोरेज खाली करने का भी निर्देश दिया है. अब अगर यहां से महीने भर आलू निकाला भी गया, तो अधिकतम पांच से छह लाख टन आलू की खपत यहां हो पायेगी और बाकी 10 लाख टन आलू का क्या होगा, यह उनकी समझ के बाहर है. राज्य सरकार ने आलू के निर्यात पर रोक लगा दी है, तो ऐसी हालत में आलू को नष्ट करने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा, इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से अपने पहले पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

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