UP News: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से सरकारी लापरवाही का एक मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति का आरोप है कि वह पूरी तरह जीवित है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में उसे मृत दिखाकर उसके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया. अब पीड़ित पिछले दो वर्षों से खुद को जिंदा साबित करने और न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.
क्या है पूरा मामला?
मामला चित्रकूट जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के रेहुटा खेड़ गांव का है. गांव निवासी रमेश यादव का कहना है कि उनके नाम से फर्जी तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया. जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो वह हैरान रह गए. उनका आरोप है कि इस फर्जीवाड़े की वजह से उन्हें सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ लेने में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
ऋण लेने के लिए दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप
रमेश यादव ने बताया कि गांव के ही रहने वाले राजेंद्र कुमार पुत्र रामप्रताप यादव ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ऋण लेने के लिए उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. आरोप है कि ऋण की किस्तों और भुगतान से बचने के उद्देश्य से उनकी जानकारी और सहमति के बिना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया गया, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाकर आर्थिक लाभ लिया जा सके.
दो साल से लगा रहा सरकारी दफ्तरों के चक्कर
पीड़ित का कहना है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद से वह लगातार अधिकारियों के पास अपनी शिकायत लेकर जा रहे हैं. पिछले करीब दो वर्षों से वह खुद को जीवित साबित करने और रिकॉर्ड में सुधार कराने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है.
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
रमेश यादव ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त कर सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति दर्ज करने के साथ-साथ इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है.
प्रशासन की जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किस स्तर पर और किन लोगों की मिलीभगत से जारी किया गया. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों पर कार्रवाई की जा सकती है.
Input: Ravi Ranjan Kumar
