UP News: उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी और मर्चेंट नेवी में कार्यरत 32 वर्षीय राकेश चौहान की वेनेजुएला में ड्यूटी के दौरान हुई मौत अब कई सवाल खड़े कर रही है. कंपनी ने परिवार को बताया था कि राकेश जहाज पर गिर गए थे और बाद में इलाज के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई. हालांकि, भारत पहुंचने के बाद शव के पोस्टमार्टम में दिमाग, दिल, फेफड़े, लीवर और किडनी समेत कई महत्वपूर्ण अंग गायब मिलने का दावा किया गया, इससे मौत के कारणों को लेकर संदेह और गहरा गया है तथा परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है.
मौत के बाद उठे गंभीर सवाल
राकेश चौहान नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी से जुड़े थे और वेनेजुएला में मरीन फिटर के रूप में कार्यरत थे. परिजनों के अनुसार 7 मई को कंपनी ने सूचना दी कि राकेश जहाज पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. अगले दिन उनकी हालत नाजुक बताई गई और शाम तक मौत की खबर दे दी गई. परिवार का कहना है कि पहले दुर्घटना और बाद में हार्ट अटैक की बात कही गई, लेकिन पूरी घटना के संबंध में कोई स्पष्ट और आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई रहस्य की परतें
देवरिया में कराए गए पोस्टमार्टम में शव पर पहले से कई टांके लगे होने की बात सामने आई. रिपोर्ट के अनुसार गर्दन से कमर तक 22 और सिर पर 21 टांके पाए गए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शरीर के कई प्रमुख आंतरिक अंग मौजूद नहीं थे. विसरा भी उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण फॉरेंसिक जांच संभव नहीं हो सकी. डॉक्टरों के अनुसार अंगों के अभाव में मौत के वास्तविक कारण का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है.
परिवार ने जताई साजिश और अंग तस्करी की आशंका
राकेश की पत्नी रंजना सिंह ने पूरे मामले को संदिग्ध बताते हुए हत्या और अंग चोरी की आशंका जताई है. उनका आरोप है कि शव से जुड़े दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां हैं. उन्होंने दावा किया कि शव प्राप्ति रसीद पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जबकि रोजगार अनुबंध में दर्ज जहाज और वास्तविक तैनाती वाले जहाज के नाम भी अलग-अलग हैं. परिवार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और उचित मुआवजे की मांग की है.
भर्ती प्रक्रिया और एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल
समुद्री मामलों के जानकारों का कहना है कि भारतीय नाविकों की भर्ती अधिकृत RPSL एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और इन एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल भर्ती तक सीमित नहीं होती.उन्हें नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा, रोजगार अनुबंध की पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन भी सुनिश्चित करना होता है, इस मामले में संबंधित एजेंसी और अन्य पक्षों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है. वहीं जहाजरानी मंत्रालय और भारतीय दूतावास स्तर पर भी मामले की जानकारी जुटाए जाने की बात कही जा रही है.
Also Read: बलिया से आरा-पटना की दूरी होगी कम, यहां गंगा पर बनेगा 1600 करोड़ से आधुनिक फोरलेन पुल
