UP News: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में किस हिंदू पक्षकार के वाद को मुख्य या ‘लीड केस’ माना जाए, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि वह इस मामले को दोबारा विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने के पक्ष में है. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 2 सितंबर तक स्थगित कर दी.
बिना नोटिस के मुख्य वाद तय करने पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल अर्जी किसी अन्य मुद्दे से संबंधित थी, लेकिन सभी वादियों को नोटिस दिए बिना ही यह तय कर दिया गया कि कौन सा वाद मुख्य मुकदमा होगा. हाईकोर्ट ने एक अलग मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया था. इसी फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई है.
हिंदू पक्ष ने भी हाईकोर्ट भेजने की मांग की
सुनवाई के दौरान कुछ हिंदू पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मुख्य वाद तय करने के मुद्दे पर नए सिरे से फैसला होना चाहिए. उन्होंने मामले को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की मांग की. पीठ ने भी संकेत दिया कि वह मामले को हाईकोर्ट भेजने के पक्ष में है.
2 सितंबर तक टली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकारों से कहा था कि वे आपस में बातचीत कर यह तय करें कि इस विवाद में कौन सा मुकदमा ‘लीड केस’ होना चाहिए. इसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई थी. बुधवार को हुई सुनवाई के बाद अब मामले को 2 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है.
कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट इस विवाद से जुड़े मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की ओर से दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. इनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के 26 मई 2023 के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील भी शामिल है, जिसके तहत मथुरा जिला अदालत में लंबित विवाद से जुड़े सभी मामलों को हाईकोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया था. इसके अलावा, हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ भी अपील लंबित है, जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानते हुए उसके वाद को मुख्य मामला घोषित किया गया था.
