UP News: उत्तर प्रदेश में खानपान की तस्वीर हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं है. कहीं शाकाहार का दबदबा है तो कहीं मांसाहार का चलन ज्यादा है. 2026 की एक रिपोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के खानपान को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमांचल में शाकाहारी आबादी का अनुपात सबसे ज्यादा है, जबकि मांसाहार के मामले में पूर्वांचल आगे है. खास बात यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही प्रदेश के सबसे ज्यादा स्लॉटर हाउस और मांस की दुकानें भी हैं.
पश्चिमांचल में 60 से 90 फीसदी तक शाकाहारी आबादी
रिपोर्ट में पश्चिमांचल में शाकाहारी आबादी का अनुमानित स्तर 60 से 90 फीसदी तक बताया गया है. हरियाणा और राजस्थान की सीमा से लगे क्षेत्रों में शाकाहार का स्तर सबसे ज्यादा बताया गया है. मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में करीब 60 फीसदी आबादी शाकाहारी बताई गई है. वहीं, मथुरा-वृंदावन में यह आंकड़ा करीब 90 फीसदी तक पहुंच जाता है.
मांस का कारोबार भी पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा
खानपान के आंकड़ों के साथ मांस कारोबार की तस्वीर भी दिलचस्प है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में सबसे ज्यादा स्लॉटर हाउस पश्चिमांचल में हैं. घरेलू मांग के लिए कटान के अलावा इसी क्षेत्र से सबसे ज्यादा मांस का निर्यात भी होता है. यानी जिस क्षेत्र में शाकाहारी आबादी का अनुपात ज्यादा बताया गया है, वहीं मांस कारोबार का नेटवर्क भी बड़ा है.
यूपी में 50 हजार से ज्यादा मांस की दुकानें
खाद्य सुरक्षा विभाग के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में 50 हजार से अधिक खुदरा मांस की छोटी-बड़ी दुकानें हैं. इनमें करीब 30 फीसदी दुकानें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं. स्लॉटर हाउस की संख्या भी इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा बताई गई है. एपीडा में पंजीकृत इकाइयों में करीब 40 से 50 फीसदी इकाइयां उत्तर प्रदेश की बताई गई हैं. रिपोर्ट में अलीगढ़ को सबसे बड़ा क्लस्टर बताया गया है. इसके अलावा गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली और हापुड़ में भी ऐसी इकाइयां हैं.
पूर्वांचल में मांसाहार का चलन ज्यादा
रिपोर्ट का दूसरा अहम पहलू पूर्वांचल से जुड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, मांसाहार के मामले में पूर्वांचल पश्चिमांचल से आगे है. हालांकि, पूर्वांचल के सभी शहरों की स्थिति एक जैसी नहीं है. अलग-अलग क्षेत्रों में खानपान की पसंद में अंतर देखने को मिलता है.
लखनऊ में करीब 45 फीसदी शुद्ध शाकाहारी
रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में करीब 45 फीसदी लोग शुद्ध शाकाहारी हैं. कानपुर में शाकाहारी आबादी का अनुमान 48 से 50 फीसदी है. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद शाकाहार के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है.
वाराणसी-प्रयागराज में 52 से 55 फीसदी
वाराणसी और प्रयागराज के नए विकसित क्षेत्रों में शाकाहारी आबादी का आंकड़ा 52 से 55 फीसदी बताया गया है. वहीं, बुंदेलखंड में यह दर करीब 47 फीसदी है. अवध क्षेत्र में शाकाहारी आबादी का अनुमान 45 से 55 फीसदी बताया गया है.
यूपी में 35 केंद्रीय और 25 स्टेट लाइसेंसधारी इकाइयां
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 35 केंद्रीय लाइसेंसधारी, 25 स्टेट लाइसेंसधारी और 69 अन्य पंजीकृत निर्यात इकाइयां हैं. वहीं, प्रदेश में स्लॉटर हाउस की संख्या करीब 260 बताई गई है. उन्नाव और बाराबंकी के कुर्सी रोड को मध्य क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया गया है.
खानपान की पसंद सिर्फ धर्म से तय नहीं होती
रिपोर्ट में खानपान की पसंद को केवल धार्मिक नजरिए से देखने से अलग बात कही गई है. इसमें सेहत और पर्यावरण को भी अहम कारक बताया गया है. खाद्य विशेषज्ञ रीता आनंद के अनुसार, शाकाहारी भोजन में भी ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व देते हैं. वहीं, अधिक मांसाहार से मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है.
यूपी के अलग-अलग हिस्सों की कहानी अलग
इन आंकड़ों से उत्तर प्रदेश के खानपान की एक अलग तस्वीर सामने आती है. पश्चिमी यूपी में शाकाहार का अनुपात ज्यादा बताया गया है, जबकि पूर्वांचल में मांसाहार का चलन अधिक है. वहीं, मांस कारोबार के मामले में पश्चिमांचल प्रदेश का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
