Uttar Pradesh Assembly History: देश को आजादी मिलने के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम था जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार देना. 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव हुए. इसी चुनावी प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश में पहली निर्वाचित विधानसभा का गठन हुआ. 8 मार्च 1952 को गठित इस विधानसभा ने प्रदेश की लोकतांत्रिक राजनीति के एक नए दौर की शुरुआत की.
1952 में 430 सीटों पर हुआ था चुनाव
1952 के चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा की 430 सीटों के लिए चुनाव हुआ. कुल 347 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव कराया गया. इनमें 264 एक-सदस्यीय और 83 दो-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र थे. चुनाव में कुल 2,604 उम्मीदवार मैदान में थे. चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की और 388 सीटें जीतीं. सोशलिस्ट पार्टी को 20 सीटें मिलीं. बाकी सीटों पर अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. चुनाव के बाद गोविंद बल्लभ पंत ने मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व किया.
पहली विधानसभा में 431 सदस्य निर्धारित थे
1952 के चुनाव में 430 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि संविधान के प्रावधानों के तहत यूपी विधानसभा की सदस्य संख्या 431 निर्धारित की गई थी. इसमें एक नामित एंग्लो-इंडियन सदस्य भी शामिल था. बाद में संशोधन के जरिए सदस्य संख्या में बदलाव हुआ.
आत्माराम गोविंद खेर बने पहले विधानसभा अध्यक्ष
पहली विधानसभा के अध्यक्ष आत्माराम गोविंद खेर थे. 20 मई 1952 से विधानसभा अध्यक्ष बने और 10 अप्रैल 1957 तक इस पद पर रहे. इससे पहले वह 1937 और 1946 में भी विधानसभा के सदस्य रह चुके थे.
पहली विधानसभा के महत्वपूर्ण सदस्य
| क्रम | कार्यकाल | पद | नाम | दल |
| 1 | 1952–1957 | मुख्यमंत्री | गोविंद बल्लभ पंत | कांग्रेस |
| 2 | 1952–1957 | अध्यक्ष | आत्माराम गोविंद खेर | कांग्रेस |
| 3 | 1952–1957 | उपाध्यक्ष | हरगोविंद पंत | कांग्रेस |
| 4 | 1952–1957 | सदन के नेता | गोविंद बल्लभ पंत | कांग्रेस |
| 5 | 1952–1955 | विपक्ष के नेता | लोकबंधु राज नारायण | सोशलिस्ट पार्टी |
| 6 | 1955–1957 | विपक्ष के नेता | गेंदा सिंह | प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) |
आज की विधानसभा से कितना अलग था स्वरूप?
1952 में यूपी विधानसभा के 430 निर्वाचन क्षेत्र थे. विधानसभा की सदस्य संख्या 431 निर्धारित थी. बाद के वर्षों में परिसीमन और संवैधानिक बदलावों के साथ विधानसभा का आकार बदला. 1967 तक विधानसभा की सदस्य संख्या 431 थी, जिसमें एक नामित एंग्लो-इंडियन सदस्य शामिल था. आज उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सीटें हैं. 2000 में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन और उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद विधानसभा की सीटों की संख्या 403 हुई.
1952 में शुरू हुआ लोकतांत्रिक सफर
1952 की पहली विधानसभा उस दौर में बनी, जब देश आजादी के बाद अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत कर रहा था. विधानसभा सरकार की नीतियों पर चर्चा, कानून बनाने और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने का प्रमुख मंच बनी. 8 मार्च 1952 को गठित पहली विधानसभा ने उत्तर प्रदेश के उस लंबे लोकतांत्रिक सफर की शुरुआत की, जिसका मौजूदा स्वरूप आज 403 सदस्यीय विधानसभा के रूप में दिखाई देता है.
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