UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी के भीतर उम्मीदवारों को लेकर बड़ा मंथन शुरू होने की खबर है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के आंतरिक सर्वे में कुछ मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी, स्थानीय स्तर पर कमजोर पकड़ और एंटी-इनकंबेंसी के संकेत मिले हैं. इसी आधार पर 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट पर दोबारा विचार किए जाने की चर्चा है. हालांकि, अभी तक बीजेपी ने टिकट काटने वाले विधायकों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है. आइए जानते हैं राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह से हुई बातचीत में उन्होंने क्या कुछ विश्लेषण किया.
100+ विधायकों पर क्यों नजर?
बीजेपी के लिए सबसे बड़ा आधार 2024 का लोकसभा चुनाव माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में बीजेपी को सिर्फ 33 सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की. कांग्रेस को छह और आरएलडी को दो सीटें मिलीं. यानी 2024 में यूपी के चुनावी मैदान में बीजेपी को 2019 की तुलना में बड़ा झटका लगा. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए चुनौती यह है कि लोकसभा चुनाव में कमजोर पड़े इलाकों में फिर से संगठन और उम्मीदवारों की पकड़ मजबूत की जाए.
2022 में 255 सीटें, अब बदला चुनावी गणित
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले 255 सीटें जीती थीं. वहीं समाजवादी पार्टी को 111 सीटें मिली थीं. यह आंकड़ा बताता है कि बीजेपी के पास अभी भी विधानसभा स्तर पर बड़ा आधार है, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव ने पार्टी को कमजोर कड़ियों की पहचान करने का संकेत जरूर दिया है. यही वजह है कि 2027 के लिए उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी इस बार पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है.
योगी का 115 सीटों पर फोकस भी इसी रणनीति का हिस्सा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही 115 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रहे हैं. मई 2026 से अब तक वह 44 से ज्यादा जिलों का दौरा कर चुके हैं और इन विधानसभा क्षेत्रों में 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास हुआ है. खास बात यह है कि इन 115 सीटों में से 67 पर 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था. यानी बीजेपी सिर्फ उम्मीदवारों पर ही नहीं, बल्कि कमजोर हुए चुनावी इलाकों पर भी विशेष ध्यान दे रही है.
संगठन में भी बड़ा बदलाव
बीजेपी ने 2027 की तैयारी को लेकर संगठनात्मक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ाई है. पार्टी ने विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाया है और सितंबर से चुनावी तैयारियों को तेज करने की रणनीति सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता भी यूपी में संगठन और चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं. इसके अलावा बीजेपी सरकार की तरफ से सड़क, बिजली और पानी जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी तेजी से काम करने की रणनीति सामने आई है. इसे सत्ता विरोधी माहौल को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
अगर टिकट कटे तो पुराने चेहरों की जगह कौन?
यही 2027 के चुनाव का सबसे दिलचस्प सवाल बन गया है. अगर पार्टी बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों की जगह नए चेहरों को उतारती है, तो कई सीटों पर जातीय समीकरण, स्थानीय गुटबाजी और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ नए सिरे से तय होगी. बीजेपी पहले भी दूसरे राज्यों में बड़े पैमाने पर टिकट बदलने की रणनीति अपना चुकी है. यूपी में भी अगर ऐसा प्रयोग किया जाता है तो यह सिर्फ टिकट बदलने का फैसला नहीं होगा, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के चुनावी नुकसान की भरपाई की कोशिश के तौर पर देखा जाएगा.
लेकिन अभी सबसे जरूरी बात—टिकट कटना तय नहीं
100 से ज्यादा विधायकों के टिकट कटने की चर्चा फिलहाल मीडिया रिपोर्टों और कथित आंतरिक सर्वे पर आधारित है. बीजेपी ने अभी यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा है कि 100 या उससे ज्यादा मौजूदा विधायकों का टिकट काटा जाएगा. इसलिए अभी इसे “टिकट पर संकट” या “पुनर्विचार की संभावना” के रूप में देखना ज्यादा सही होगा.
फिर भी संकेत बड़े हैं—2024 के लोकसभा झटके के बाद बीजेपी 2027 में कोई बड़ा जोखिम लेने से बचना चाहती है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि योगी सरकार सत्ता बचाएगी या नहीं, बल्कि यह भी है कि बीजेपी सत्ता बचाने के लिए अपने कितने मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा करेगी.
2027 के चुनाव में अगर 100+ सीटों पर चेहरे बदले गए, तो यूपी की सियासत में यह सबसे बड़े चुनावी प्रयोगों में से एक होगा.
