UP News: उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजन को सिर्फ सामाजिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक तौर पर भी मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है. इन्हीं में से एक शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना है, जिसके तहत दिव्यांग दंपतियों को शादी के बाद आर्थिक सहायता दी जाती है. पिछले नौ वर्षों में इस योजना का लाभ 6698 दिव्यांग दंपतियों को मिल चुका है. खास बात यह है कि दंपती में कितने लोग दिव्यांग हैं, उसी के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है.
दंपती में कितने दिव्यांग, उसी हिसाब से मिलती है रकम
इस योजना का लाभ लेने के लिए दंपती में दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए. इसके बाद दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर आर्थिक सहायता तय की जाती है. अगर युवक दिव्यांग है तो उसे 15 हजार रुपये दिए जाते हैं. वहीं, अगर युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये की सहायता मिलती है. यदि पति-पत्नी दोनों दिव्यांग हैं, तो दंपती को 35 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है.
नौ साल में 6698 दंपतियों को मिला लाभ
सरकार की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपतियों को इस योजना का लाभ दिया गया है. सिर्फ वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपतियों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया गया. इससे पता चलता है कि योजना के तहत लगातार पात्र दंपतियों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.
2026-27 में अब तक 18 दंपतियों को मिली मदद
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी योजना के तहत लाभ देने का सिलसिला जारी है. अब तक 18 दिव्यांग दंपतियों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. इस वित्तीय वर्ष में योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसमें से अब तक 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
ऑनलाइन आवेदन और सीधे खाते में पहुंचती है रकम
शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना को ऑनलाइन संचालित किया जा रहा है. इसका मकसद पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है. योजना के तहत स्वीकृत धनराशि लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे दी जाती है. इससे सहायता राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचती है.
वैवाहिक जीवन में आर्थिक सहारा देना है उद्देश्य
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डा. अमित कुमार राय ने बताया कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना का उद्देश्य दिव्यांगजन को उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है. योजना के जरिए पात्र दिव्यांग दंपतियों को शादी के बाद आर्थिक सहायता देकर उन्हें सशक्त बनाने की कोशिश की जा रही है.
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