Up News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है. कैमरों में दिखे संदिग्धों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है. एसआईटी की जांच में कोई भी साधु संत दोषी नहीं मिला है. ऐसे में पूज्य संतों और ग्यारह सौ कर्मचारियों पर अनर्गल आरोप लगाना बहुत आश्चर्यजनक है. आरोप लगाने वाली सपा और कांग्रेस ने सदैव प्रभु राम का अपमान किया है.
विपक्ष पर सनातन विरोधी आचरण का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा और कांग्रेस के सांसदों द्वारा संसद में लगाए गए आरोप सीधे तौर पर सनातन धर्म का अपमान हैं. इन दलों का इतिहास हमेशा से सनातन संस्कृति के विरोध का रहा है. इतिहास गवाह है कि एक समय में समाजवादी पार्टी की सरकार ने पवित्र सरयू नदी को रक्तरंजित करने का काम किया था. ये वही लोग हैं जो बाईस जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने के बावजूद समारोह में शामिल नहीं हुए थे.
राज्य की छवि बिगाड़ने की साजिश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है. राज्य के किसान अब आत्महत्या नहीं कर रहे हैं. जिन लोगों ने युवाओं के हक पर डकैती डाली थी, वे आज प्रदेश की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं. सदन में पीठ का अपमान और मार्शलों से धक्कामुक्की करना बेहद शर्मनाक है. इनका यह आचरण प्रदेश के पच्चीस करोड़ लोगों का अपमान है.
सदन में हंगामा और विधायक पर कड़ी कार्रवाई
विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया. बजट पर चर्चा शुरू होते ही सपा विधायकों ने राम मंदिर मुद्दे को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया. इस दौरान सपा विधायक सचिन द्वारा मुख्यमंत्री की तस्वीर दिखाए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना बेहद नाराज हो गए.अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए विधायक को पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर करने का आदेश दिया और सदस्यता समाप्त करने की चेतावनी भी जारी कर दी.
यह भी पढ़े: यूपी अनुपूरक बजट विकास, स्वास्थ्य और कृषि पर जोर
