OP राजभर के ट्वीट से गरमाई UP की जातीय सियासत, अखिलेश से पूछा- धर्मेंद्र प्रधान यादव होते तो भी मांगते इस्तीफा?

UP News: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यूपी की राजनीति में नया मोड़ आ गया है. सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए जाति पर आधारित सवाल उठाया है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर जोरदार बहस छिड़ गई है.

UP News: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. उत्तर प्रदेश में अब इस मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है. इस्तीफे पर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब जातीय रंग लेती दिखाई दे रही है. उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए एक बड़ा सवाल खड़ा किया है. राजभर ने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान की जाति कुर्मी की जगह यादव होती, तब भी क्या समाजवादी पार्टी उनके इस्तीफे की मांग करती? उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है.

राजभर ने X पर पूछा सीधा सवाल

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मित्र, अखिलेश यादव जी, आपसे एक प्रश्न है. अगर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जाति 'कुर्मी' की जगह 'यादव' होती, तो आपका रुख क्या होता? क्या आप इस्तीफा मांगते या उनका बचाव करते? आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी, मित्र." राजभर का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई. समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, धर्मेंद्र प्रधान को उनके कुर्मी समुदाय से होने की वजह से निशाना बना रहे हैं. वहीं कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि कुर्मी समाज इस मुद्दे का जवाब चुनाव में देगा. अब ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है और राजनीतिक दल भी इस पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं.

कैसे पहुंचा मामला इस्तीफे तक?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी की लीडरशिप, सोनम वांगचुक के अनशन और जंतर-मंतर पर Gen-Z छात्रों के आंदोलन के बाद बीते शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की पहली बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है. एक तंज से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंचा और बड़े जन आंदोलन का रूप ले लिया. इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम किस तरह राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस बन सकती है.

अब सबकी नजर अगले राजनीतिक कदम पर

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष की मंशा और राजनीति पर सवाल खड़े कर रहा है. ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि यह सियासी विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक दलों की क्या रणनीति रहती है.

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By Lucky Kumari

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