मथुरा के 18 गांव बने साइबर ठगी का गढ़, 7 जुलाई की कार्रवाई ने खोली नेटवर्क की परतें, 312 लोगों की गिरफ़्तारी से डर का माहौल

UP News: धार्मिक शहर मथुरा अब साइबर अपराध का बड़ा केंद्र बन गया है, जिसे 'मिनी जामताड़ा' कहा जा रहा है. 18 गांवों की मैपिंग और 312 गिरफ्तारियों के बावजूद, पुलिस के लिए इस नेटवर्क को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है.

UP News: उत्तर प्रदेश का धार्मिक शहर मथुरा अब तेजी से साइबर अपराध के बड़े केंद्र के रूप में सामने आ रहा है. संगठित ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के कारण इसे अब 'मिनी जामताड़ा' कहा जाने लगा है. पिछले एक साल में पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के 177 मामले दर्ज किए हैं, जबकि 312 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह लगातार नई तकनीक, फर्जी पहचान और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

7 जुलाई की कार्रवाई ने खोली नेटवर्क की परतें

7 जुलाई को पुलिस ने मथुरा के आठ गांवों में बड़े स्तर पर छापेमारी की. ड्रोन की मदद से खेतों और संकरी गलियों में भाग रहे संदिग्धों का पीछा किया गया. पुलिस टीमों के पहुंचते ही कई लोग फरार हो गए, जबकि लंबी पूछताछ के बाद 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई साइबर नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हुई.

गृह मंत्रालय के डिजिटल इनपुट से मिली सफलता

पुलिस के अनुसार यह अभियान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और संचार साथी पोर्टल से मिले डिजिटल इनपुट के आधार पर चलाया गया. जांच के दौरान करीब 7,000 मोबाइल नंबर और 1,400 बैंक खाते ऐसे मिले, जिनका संबंध इन गांवों से जुड़ा पाया गया.

सरगना से लेकर फील्ड ऑपरेटर तक गिरफ्त में

गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के सरगना से लेकर फील्ड स्तर पर काम करने वाले सदस्य तक शामिल हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है और अलग-अलग समूह अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं. कोई फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता है, कोई लोगों को फोन कर ठगी करता है, जबकि दूसरा समूह ठगी की रकम निकालने का काम करता है.

रिसर्च रिपोर्ट में भी सामने आया था मथुरा का नाम

आईआईटी कानपुर से जुड़े स्टार्टअप फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट में भी मथुरा को देश के बड़े साइबर अपराध केंद्रों में शामिल किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार भारत में होने वाले साइबर अपराधों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा जिलों से संचालित होता है, जिनमें राजस्थान का भरतपुर, उत्तर प्रदेश का मथुरा, हरियाणा का नूंह और झारखंड का जामताड़ा प्रमुख हैं.

18 गांवों की हुई मैपिंग

जांच एजेंसियों ने गोवर्धन, बरसाना, शेरगढ़, छाता और कोसी थाना क्षेत्रों के 18 गांवों की पहचान की है, जहां से संगठित साइबर ठगी संचालित होने की आशंका है. ये गांव राजस्थान और हरियाणा की सीमा के करीब स्थित हैं, जिससे अपराधियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भागने में आसानी होती है.

खेतों में बैठकर होती है ऑनलाइन ठगी

जांच में सामने आया है कि कई आरोपी खुले खेतों में बैठकर साइबर ठगी को अंजाम देते हैं, ताकि दूर से पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख सकें. ठगी के लिए OLX पर फर्जी खरीद-बिक्री, क्यूआर कोड स्कैम, फर्जी एडवांस पेमेंट, नकली होटल बुकिंग वेबसाइट और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया जाता है.

युवाओं को आसान कमाई का लालच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को जोड़ा जा रहा है. आसान और जल्दी पैसा कमाने के लालच में कई युवक पढ़ाई और सामान्य रोजगार छोड़कर साइबर अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. यही कारण है कि इन गिरोहों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है.

पुलिस की चुनौती अभी बाकी

मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शैलेश कुमार के अनुसार साइबर अपराध की शिकायतों और खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार छापेमारी जारी है. हालांकि, राज्यों की सीमाओं से सटे होने और गिरोहों के लगातार तकनीक बदलने के कारण पूरे नेटवर्क को खत्म करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.

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By रवि रंजन कुमार

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