लखनऊ : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सवाल पूछा है और इस संबंध में जवाब मांगा है.साथ ही उन्हें असंतोष को खत्म करने को कहा है. यह सवाल चार दलित सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व काे की गयी शिकायत के बाद पूछा गया है. हाल में उत्तरप्रदेश के चार दलित सांसदों ने पत्र लिख कर सरकार की शिकायत की. इनमें से एक राबर्टसगंज के सांसद छोटेलाल खरवारने अपनी शिकायत में कहा है कि जब वे मुख्यमंत्री के पास शिकायत लेकर पहुंचे तो उनकी बात नहीं सुनी गयी और उन्हें डांट कर चलता कर दिया गया.
योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी. उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी भेंट की. इन मुलाकातों को मीडिया में सामान्य मुलाकात बताया गया, लेकिन हाल में उत्तरप्रदेश में भाजपा के दलित सांसदों की नाराजगी से यह जुड़ा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने सांसदों की नाराजगी परयोगी सरकार के प्रति असंतोष प्रकट की है.
उधर, संघ के दो बड़े पदाधिकारी दत्तात्रेय हसबोले और डाॅ कृष्ण गोपाल ने भी उत्तरप्रदेश का दौरा किया है और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस से जुड़े लोगों व आमलोगों से सरकार के बारे में फीडबैक लिया है. दोनों ने दो उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों व अन्य नेताओं से बातचीत की है.
दरअसल, समाजवादी पार्टी अौर बहुजन समाज पार्टी के गठजोड़ के बाद गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा की आगामी चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गयी है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भले ही इसे दो उपचुनाव हारने मात्र की बात कह रहे हों और कई राज्यों में चुनाव जीतने का उदाहरण दे रहे हों, लेकिन वे भी इसे सहजता से नहीं ले रहे हैं. भाजपा को चिंता है कि कहीं बुआ-भतीजे का यह नया गठजोड़ 2019 में उसकी जीत की राह का रोड़ा न बन जाये.
2014 में भाजपा को पहली बार बहुमत दिलाने में उत्तरप्रदेश का सबसे योगदान था, जहां पार्टी ने 80 में 72 सीटें जीत ली थी. उस समय विपक्षी दल अलग-अलग थे, लेकिन अब वे साथ आ चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यह दावा कर रहे हैं कि विपक्ष अगर एकजुट हो जाये तो भाजपा क्या मोदी भी बनारस से अगला चुनाव हार जायेंगे. इन दावों को भाजपा गंभीरता से ले रही है.
ऐसे में उसने डैमेज कंट्रोल की तैयारी शुरू कर दी है. इस क्रम में पार्टी ने अपने नेताओं की बात सुनने का निर्णय लिया है. पार्टी अागामी दिनों में जमीनी हालात का आकलन कर सरकार और संगठन के स्तर पर भी कुछ बदलाव कर सकती है और इसमें सबसे अहम कारक होगा संघ की ओर मिला फीडबैक.
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