नेहरू के सामने फाड़ दिया था चेक, बोले- ‘आजादी के लिए लड़े, इनाम के लिए नहीं’, 13 बार जेल गए बाबा रामलाल की कहानी

Independence Day 2026 : स्वतंत्रता दिवस पर यूपी के सुल्तानपुर के स्वतंत्रता सेनानी बाबा रामलाल मिश्र की कहानी पढ़िए. अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए वह 13 बार जेल गए. आजादी के बाद जब उन्हें सम्मान राशि का चेक दिया गया तो उन्होंने नेहरू के सामने ही उसे फाड़ दिया और कहा- आजादी के लिए लड़े हैं, इनाम के लिए नहीं.

Independence Day 2026 : आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों ने अपना सबकुछ देश के नाम कर दिया. कुछ नाम इतिहास की किताबों में दर्ज हो गए, तो कुछ गुमनामी में चले गए. सुल्तानपुर के पयागीपुर निवासी बाबा रामलाल मिश्र भी ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए वह 13 बार जेल गए. लेकिन उनकी कहानी का सबसे बड़ा अध्याय आजादी के बाद सामने आया, जब पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने उन्होंने सम्मान राशि का चेक फाड़ दिया.

आजादी की लड़ाई में 13 बार पहुंचे जेल

बाबा रामलाल मिश्र का स्वतंत्रता संघर्ष सिर्फ भाषणों और आंदोलनों तक सीमित नहीं था. उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया और इसकी कीमत जेल जाकर चुकाई.साल 1917 में लोकमान्य तिलक के शोक दिवस के मौके पर उन्हें छह महीने की सजा सुनाई गई. साथ ही 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. इसके बाद 1923 के झंडा सत्याग्रह में उन्हें एक महीने की कैद हुई.साल 1930 के नमक सत्याग्रह में बाबा रामलाल को डेढ़ साल जेल में रहना पड़ा. 1934 में उन्हें फिर पांच महीने की सजा मिली. इसके बाद भी उनका संघर्ष रुका नहीं.

झंडा लेकर निकले तो पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार

साल 1940 में बाबा रामलाल मिश्र ने सुंदरलाल पार्क में झंडा फहराया. अंग्रेजी हुकूमत को यह नागवार गुजरा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.इसके बाद 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और करीब दो साल तक नैनी सेंट्रल जेल में रखा.बताया जाता है कि जेल में बाबा रामलाल मिश्र लाल बहादुर शास्त्री के साथ एक ही कमरे में रहे थे. इस दौरान भी उनके भीतर आजादी की लौ कमजोर नहीं हुई.

आजादी मिली, लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अभी बाकी था

15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ. अंग्रेजी हुकूमत खत्म हुई और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को सम्मान मिलने लगा.इसी दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को आनंद भवन, इलाहाबाद बुलाया. वहां सेनानियों को सम्मान स्वरूप कुछ राशि चेक के माध्यम से देने की कोशिश की गई.बाबा रामलाल मिश्र भी वहां मौजूद थे.लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह उनकी पूरी जिंदगी के विचारों को बयां करता है.

नेहरू के सामने फाड़ दिया चेक

बाबा रामलाल मिश्र के प्रपौत्र वरुण मिश्र के मुताबिक, जब उन्हें सम्मान राशि का चेक दिया गया तो उन्होंने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया.उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने ही चेक फाड़ दिया.बाबा रामलाल का कहना था कि उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई किसी इनाम या पैसे के लिए नहीं लड़ी थी.उनके इस फैसले ने साफ कर दिया कि उनके लिए आजादी की कीमत किसी रकम से कहीं ज्यादा थी.

किसान आंदोलन से लेकर जेल तक, हर मोर्चे पर संघर्ष

बाबा रामलाल मिश्र ने सिर्फ अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलनों में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि अवध के किसान आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.उन्होंने अपने जीवन के कई साल देश की आजादी के संघर्ष में लगा दिए. बार-बार गिरफ्तारी हुई. जेल की यातनाएं सहीं. फिर भी उन्होंने अपने रास्ते से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया.

सुल्तानपुर के इतिहास का वह नाम, जिसे याद रखना जरूरी है

बाबा रामलाल मिश्र की कहानी सिर्फ 13 जेल यात्राओं की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जिसमें देश पहले और व्यक्तिगत लाभ बाद में था.अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने जेल की सजा स्वीकार की. आजादी मिली तो सम्मान के बदले मिलने वाली रकम भी ठुकरा दी.

नेहरू के सामने चेक फाड़ने का वह प्रसंग आज भी बताता है कि कुछ लोगों के लिए आजादी कोई सौदा नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प थी. सुल्तानपुर के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बाबा रामलाल मिश्र का नाम इसी त्याग और निष्ठा के लिए हमेशा याद किया जाएगा.

Also Read: 80 से ज्यादा एनकाउंटर, STF-ATS के संस्थापक सदस्य कौन हैं पूर्व IPS राजेश पांडेय, जो राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की रेस में आगे?


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By खुशी सिंह

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >