घाघरा का कहर: अपने ही हाथों उजाड़ रहे आशियाना, गोपालनगर टांडी में बेबस ग्रामीणों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा

UP News: गोपाल नगर टांडी के लोग घाघरा नदी के भयानक कटाव का दंश झेल रहे हैं. मजबूरी में लोग अपने बनाए घरों को तोड़ रहे हैं. प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों में भारी रोष है.

UP News: घाघरा नदी का रौद्र रूप गोपाल नगर टांडी के लोगों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं रह गया है. कटान की जद में आए परिवार अब अपने ही हाथों से वर्षों की मेहनत से बनाए घरों को तोड़ने को मजबूर हैं. कोई छत की टीन उतार रहा है, कोई दरवाजे-खिड़कियां निकाल रहा है तो कोई ईंटें बचाने की जुगत में लगा है. जिन आंगनों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ आंसू, मलबा और बेबसी दिखाई दे रही है.


अपने हाथों से अपने घरौंदे को उजाड़ते कटान पीड़ित

आंखों के सामने उजड़ रही जिंदगी, हर हथौड़े की चोट के साथ छलक पड़े आंसू

गोपाल नगर टांडी में कई मकान नदी में समा चुके हैं, जबकि कई परिवार अपने घर खुद तोड़कर सुरक्षित स्थानों पर सामान पहुंचाने में जुटे हैं. लोगों का कहना है कि अगर मकान नहीं तोड़ेंगे तो नदी सब कुछ निगल जाएगी. इसलिए मजबूरी में अपनी ही दुनिया को उजाड़ना पड़ रहा है.एक बुजुर्ग ग्रामीण ने नम आंखों से कहा, "जिस घर को जिंदगी भर की कमाई से बनाया, आज उसी को अपने हाथों से तोड़ रहे हैं. इससे बड़ा दुख क्या होगा?"


अपने घरौंदे को उजाड़ने के बाद ट्राली से सामान ढोते हुए

डीएम साहब सिर्फ देखने आते हैं, समाधान कोई नहीं करता

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के अधिकारी कई बार दौरा कर चुके हैं, लेकिन कटान रोकने के लिए अब तक कोई स्थायी और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. लोगों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब होते जा रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा, अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं. कटान रोकने का इंतजाम आज तक नहीं हुआ.

घाघरा के कटान में समाते मकान

सांसद-विधायक पर भी फूटा गुस्सा

कटान पीड़ितों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों पर भी साफ दिखाई दिया. ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय हर नेता गांव में दिखाई देता है, लेकिन संकट की इस घड़ी में कोई साथ खड़ा नहीं है. एक महिला ने कहा, "वोट मांगने सब आए थे, लेकिन अब हमारा घर उजड़ रहा है तो कोई हाल पूछने तक नहीं आया. क्या हम इस जिले के नागरिक नहीं हैं?


कृषियोग्य भूमि को काटती घाघरा लहरें

रात भर जाग रहे लोग, हर पल नदी के बढ़ते कदमों का डर

गांव में दहशत का माहौल है. लोग रात भर जागकर नदी की ओर नजरें टिकाए रहते हैं. किसी को डर है कि अगला नंबर उसके घर का होगा तो कोई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज चुका है. कई परिवार खुले आसमान के नीचे या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं.


अपने हाथों से अपना मकान तोड़ते लोग

राहत से ज्यादा चाहिए स्थायी समाधान

कटान पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा चाहिए. ग्रामीणों ने मांग की कि नदी किनारे तत्काल मजबूत कटानरोधी कार्य कराया जाए, विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.


घाघरा का विकराल रूप

गांव का दर्द बना पूरे इलाके की चिंता

गोपाल नगर टांडी की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि घाघरा किनारे बसे उन तमाम गांवों की है जो हर बरसात में इसी दर्द से गुजरते हैं. सवाल यही है कि आखिर कब तक लोग अपनी ही मेहनत से बनाए आशियाने अपने हाथों से उजाड़ते रहेंगे और कब तक प्रशासनिक आश्वासन ही उनका सहारा बना रहेगा?

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By Tilak Kumar

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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