Up News: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए e-NAM (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) कृषि उपज बेचने का एक नया और डिजिटल विकल्प बन रहा है. कभी अपनी फसल के लिए स्थानीय मंडियों और सीमित खरीदारों पर निर्भर रहने वाले किसान अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के खरीदारों से जुड़ सकते हैं. e-NAM की शुरुआत 14 अप्रैल 2016 को केंद्र सरकार ने की थी. इसका उद्देश्य देश की कृषि उपज मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़कर किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है.
व्यापारियों पर निर्भरता होगी खत्म
e-NAM के माध्यम से किसान अपनी उपज की ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा ले सकते हैं, जहां अलग-अलग खरीदार बोली लगाते हैं. इससे किसानों को अपनी फसल के लिए प्रतिस्पर्धी कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है और उन्हें केवल स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. डिजिटल प्रक्रिया के कारण बोली और कीमतों में पारदर्शिता बढ़ती है, जबकि बिचौलियों की भूमिका को कम करने में भी मदद मिलती है. इससे किसान बाजार की कीमतों की जानकारी लेकर अपनी उपज बेचने का बेहतर निर्णय ले सकता है.
डिजिटल बाजार में किसानों का पहुँच
उत्तर प्रदेश में e-NAM के विस्तार से पारंपरिक मंडी व्यवस्था को आधुनिक डिजिटल बाजार से जोड़ने की कोशिश तेज हुई है. इसका मकसद किसानों को स्थानीय मंडी से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच देना और उनकी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. हालांकि, डिजिटल व्यापार का पूरा लाभ लेने के लिए किसानों को e-NAM की सुविधाओं, ऑनलाइन बोली और डिजिटल लेन-देन की जानकारी होना भी जरूरी है. कुल मिलाकर, e-NAM कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल के जरिए किसान और खरीदार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है.
इनपुट: नटवर कुमार
यह भी पढ़े: लखनऊ में 460 भूखंडों का आवंटन, 407 फ्लैटों की लॉटरी
